राज्य कृषि समाचार (State News)

मौसम के बदले मिजाज के बीच कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, देर से बुवाई में चुनें कम अवधि वाली किस्में

13 जुलाई 2026, भोपाल: मौसम के बदले मिजाज के बीच कृषि वैज्ञानिकों की सलाह, देर से बुवाई में चुनें कम अवधि वाली किस्में – आगामी पांच दिनों के दौरान मौसम आंशिक रूप से खुला रहने, कुछ स्थानों पर खंड वर्षा होने तथा आसमान में घने बादल छाए रहने की संभावना को देखते हुए मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार जिन किसानों ने अभी तक खरीफ फसलों की बुवाई नहीं की है, वे कम अवधि में तैयार होने वाली उपयुक्त किस्मों का चयन कर शीघ्र बुवाई करें।

मौसम को देखते हुए करें खेती

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। वहीं हवा की औसत गति 21 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। ऐसे में किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है।

मेड़ों की सफाई और धान की रोपाई पर दें ध्यान

कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन खेतों में बुवाई हो चुकी है, वहां मेड़ों पर उगने वाले खरपतवारों को नष्ट करें, ताकि हानिकारक कीटों को आश्रय न मिल सके। जिन किसानों की धान की नर्सरी 20 से 25 दिन की हो गई है, वे निचले क्षेत्रों के मुख्य खेतों में रोपाई करें। रोपाई से पहले पौधों को 30 मिनट तक एजोटोबैक्टर के घोल में उपचारित करने की भी सलाह दी गई है।

बीजोपचार के बाद करें बुवाई

विशेषज्ञों ने सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग, तिल एवं मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुवाई कूड़-नाली विधि से करने तथा बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज पर 2 ग्राम थायरम एवं एक ग्राम कार्बेन्डाजिम से बीजोपचार करने की सलाह दी है। वहीं अदरक की बुवाई के लिए उन्नत किस्मों का चयन कर बीजोपचार के बाद ही रोपण करने की अनुशंसा की गई है।

सब्जी फसलों की नियमित निगरानी करें

कृषि विशेषज्ञों ने भिंडी में पीली पत्ती रोग तथा बैंगन में फल एवं तना छेदक कीट के प्रकोप की संभावना को देखते हुए नियमित निरीक्षण करने की सलाह दी है। मौसम साफ रहने पर आवश्यकतानुसार अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।

पशुपालकों को भी दी गई जरूरी सलाह

विशेषज्ञों ने वर्षा ऋतु में पशुपालकों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। पशुओं को तालाबों या गंदे पानी का सेवन न कराएं तथा पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार 15 से 20 दिन के अंतराल पर कृमिनाशक दवा अवश्य पिलाएं। साथ ही हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ज्वार, मक्का एवं लोबिया की मिश्रित बुवाई करने की सलाह दी गई है।

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