बैतूल में कृषि उत्पादन (ए.पी.सी.) समूह की बैठक सम्पन्न
20 अप्रैल 2026, बैतूल: बैतूल में कृषि उत्पादन (ए.पी.सी.) समूह की बैठक सम्पन्न – कलेक्ट्रेट सभागार में शनिवार को कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की अध्यक्षता में जिले के कृषि उत्पादन (ए.पी.सी.) समूह की बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि एवं संबद्ध विभागों के जिला व विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी, एफपीओ समूहों के प्रतिनिधि, कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रतिनिधि तथा किसान संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक की शुरुआत कृषि विभाग की समीक्षा से हुई, जिसमें उप संचालक कृषि द्वारा विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत की गई। ग्रीष्मकालीन फसलों में उचित सिंचाई साधनों के उपयोग के निर्देश दिए गए तथा मूंगफली और उड़द फसल का रकबा बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने जिले में सस्टेनेबल कृषि को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप कृषि के साथ उद्यानिकी, मत्स्य पालन और पशुपालन को भी अपनाएं, जिससे आय में वृद्धि के साथ मृदा की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहे। उन्होंने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप”की थीम पर उत्पादकता बढ़ाने तथा संतुलित एवं जैविक खाद के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। खरीफ फसलों की समीक्षा के दौरान वर्तमान परिस्थितियों में मक्का और सोयाबीन फसल के उत्पादन पर चर्चा की गई। वहीं सोयाबीन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मेड़-नाली एवं रेज्ड बेड पद्धति अपनाने तथा जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त मध्य तक कीट प्रबंधन करने की सलाह दी गई।
उर्वरकों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कलेक्टर डॉ ने जिले में भंडारण क्षमता एवं आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के आवश्यक निर्देश दिए। नरवाई जलाने की घटनाओं पर कम दंडात्मक कार्रवाई को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई।बैठक में फसल बीमा की समीक्षा के दौरान 4 अप्रैल को हुई ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को बीमा राशि उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित बीमा कंपनी को दिए गए। कलेक्टर डॉ सोनवणे ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, एफपीओ एवं विभिन्न विभागों के बीच समन्वय एवं कन्वर्जेंस के माध्यम से नवाचार करने पर जोर दिया। समन्वित कृषि प्रणाली के क्लस्टर विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
पशुपालन विभाग की समीक्षा में कृत्रिम गर्भाधान, पशु रोग नियंत्रण, दुग्ध उत्पादन एवं मिल्क रूट की जानकारी ली गई। साथ ही चारा विकास, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। क्षीरधारा ग्राम योजना अंतर्गत चयनित 37 आदर्श ग्रामों में विभिन्न गतिविधियों के संचालन पर भी जोर दिया गया। साइलेंज यूनिट की संभावनाओं का आकलन करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए। कलेक्टर डॉ सोनवणे ने सभी मैदानी अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार समन्वित कार्ययोजना बनाकर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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