राज्य कृषि समाचार (State News)

खरीफ बुवाई से पहले कृषि विभाग की एडवाइजरी, प्रमाणित बीज और पक्का बिल लेने की दी सलाह

28 मई 2026, भोपाल: खरीफ बुवाई से पहले कृषि विभाग की एडवाइजरी, प्रमाणित बीज और पक्का बिल लेने की दी सलाह – मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के कृषि उप संचालक नितेश कुमार यादव ने जिले के कृषकों को समझाइश दी है कि खरीफ फसलों की बुवाई से पूर्व गुणवत्तायुक्त बीज का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। जिले में खरीफ 2026 हेतु जिले में कपास, मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द फसलों का बीज भण्डारण एवं विक्रय का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। 

उन्होंने सलाह दी है कि किसान भाई पंजीकृत दुकान से ही बीज खरीदें और खरीदे गये बीज का पक्का बिल आवश्यक रूप से लें, जिस पर बीज की किस्म, कंपनी, बैच, लॉट नम्बर, बीज उत्पादन तिथि और अंतिम तिथि, दर, मात्रा लिखी होनी चाहिए। भविष्य में किसी समस्या की स्थिति में बिल अत्यंत आवश्यक दस्तावेज होता है। कपास बीज के पैकेट पंजीकृत विक्रेताओं से शासन द्वारा निर्धारित कपास बीजी-1 रुपये 635 प्रति पैकेट एवं बीजी-2 रुपये 901 प्रति पैकेट (475 ग्राम) दर पर ही क्रय करें।

उप संचालक कृषि यादव ने किसानों से अपील की है कि बुवाई से पूर्व बीज के अंकुरण का परीक्षण अवश्य करें तथा प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीज का ही उपयोग करें। कम अंकुरण वाले बीज का उपयोग करने से पौध संख्या प्रभावित होती है एवं उत्पादन में कमी आती है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन बीज का बाहरी आवरण अर्थात सीड कोट अत्यंत नाजुक होता है। अधिक उठापटक, ऊंचाई से गिराने या बार-बार भराई-खाली करने से बीज क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे अंकुरण प्रभावित होता है। कृषक भाई यदि ट्रुथ फुल लेबल्ड बीज का उपयोग कर रहे हैं तो उसका स्रोत, उत्पादक संस्था एवं गुणवत्ता संबंधी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। विश्वसनीय एवं पंजीकृत विक्रेता से ही बीज खरीदें। सोयाबीन फसल में अच्छे अंकुरण, प्रारंभिक वृद्धि एवं रोगों से सुरक्षा हेतु बीज उपचार अत्यंत आवश्यक है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि बीज उपचार करने से बीज एवं मृदा जनित रोगों का प्रकोप कम होता है तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। उपचारित बीज को छाया में सुखाकर उसी दिन बुवाई करें। जैविक कल्चर का उपयोग रासायनिक उपचार के बाद ही करें। जिले के कृषकों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभाग द्वारा नियमित रूप से कृषि आदानों का निरिक्षण किया जा रहा है तथा खाद एवं बीज के नमूने भी लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक उर्वरक के 55 तथा बीज के 136 नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण हेतु प्रयोगशाला को भेजे गए हैं। अमानक पाए जाने पर अधिनियम अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

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