एल-नीनो की आशंका के बीच किसानों के लिए एडवाइजरी, धान से लेकर उड़द तक इन अनुशंसित किस्मों की करें बुवाई
18 जुलाई 2026, भोपाल: एल-नीनो की आशंका के बीच किसानों के लिए एडवाइजरी, धान से लेकर उड़द तक इन अनुशंसित किस्मों की करें बुवाई – अल-नीनो की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए जबलपुर जिले के जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी प्रकोष्ठ एवं कृषि ओपीडी ने किसानों के लिए कृषि परामर्श जारी किया है। परामर्श में जिले के अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा और सूखे के अंतराल की संभावना जताते हुए किसानों को फसल चयन से लेकर जल संरक्षण और पोषक तत्व प्रबंधन तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
धान और मक्का के लिए हाइब्रिड किस्में
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से कम अवधि और सूखा-सहनशील फसलों की अनुशंसित किस्मों का चयन करने को कहा है। धान की खेती के लिए जेआरबी-1, जेआर-201, सहभागी, जेआर-81, एमटीयू-1156, दंतेश्वरी, एमटीयू-1010 और जेआर-21 किस्मों की सीधी बुवाई करने की सलाह दी गई है। वहीं मक्का के लिए जेएम-216, जेएम-218, जेएम-10, प्रताप तथा प्राइवेट हाइब्रिड किस्मों की अनुशंसा की गई है।
अहरहर से उड़द की खेती के लिए अपनाएं ये किस्म
इसी तरह अरहर की टीजेटी-501, आईसीपीएल-87, बीडीएन-716, बीडीएन-711, पूसा-991 और राजेश्वरी, कोदो की जेके-137, डीपीएस 9-1, इंदिरा कोदो-1, जेके-150 और जेके-136, कुटकी की सीजी कुटकी-1, जेके-36 और जेके-4, तिल की टीकेजी-21, टीकेजी-22, जेटी-8, जेकेजी-55, टीकेजी-36 और आरटी-351 तथा उड़द की पीयू-19, पीयू-30, पीयू-31, पीयू-40, पीयू-94, एलबीजी-402, प्रताप उड़द-1, आईपीयू 2-43 और आईपीयू 11-2 किस्मों की खेती करने की सलाह दी गई है।
जल संरक्षण और नमी बनाए रखने पर दें जोर
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से वर्षा जल संरक्षण के लिए खेत तालाब, मेड़बंदी, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और प्राकृतिक मल्चिंग अपनाने की अपील की है। साथ ही खेतों में नमी बनाए रखने के लिए हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, रिज-फरो और रेज्ड बेड तकनीक का उपयोग करने तथा अनावश्यक जुताई से बचने की सलाह दी गई है। सामान्य सीड ड्रिल से बोई गई फसलों में कुल्पा चलाने की भी अनुशंसा की गई है।
मिट्टी परीक्षण के बाद ही करें उर्वरकों का उपयोग
परामर्श में किसानों से कहा गया है कि वे मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करें। सूखे की स्थिति में अधिक मात्रा में नाइट्रोजन का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उर्वरकों का ह्रास भी होता है। रासायनिक उर्वरकों के साथ कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, कुक्कुट खाद और जैव उर्वरकों जैसे जैविक स्रोतों का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र ने खरपतवार नियंत्रण के लिए व्हील हो और साइकिल हो जैसी यांत्रिक विधियां अपनाने, कम पानी वाली फसलों के साथ फसल विविधीकरण एवं अंतर्वर्ती फसल पद्धति अपनाने की अनुशंसा की है। वहीं सूखे के तनाव की स्थिति में एक प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट अथवा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार तरल एवं नैनो उर्वरकों का छिड़काव करने को कहा गया है।
किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे सभी कृषि कार्य साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान के अनुसार करें। साथ ही जीवामृत, घनजीवामृत और फसल अवशेषों के उपयोग के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ नमी संरक्षण में भी मदद मिलेगी, जिससे कम वर्षा की स्थिति में फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ेगा।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

