सही मृदा नमूना एवं परीक्षण अपनाए – उत्पादन बढ़ाएं
लेखक: अंशिका बघेल, डॉ. भरत सिंह, डॉ. अंजली भार्गव, डॉ. दिव्या भायल, डॉ. आस्था पाण्डेय, कृषि महाविद्यालय, इंदौर (म.प्र.)
23 मई 2026, भोपाल: सही मृदा नमूना एवं परीक्षण अपनाए – उत्पादन बढ़ाएं –
मिट्टी की सही पहचान, सफल खेती की असली जान ”
किसानों की आय और खेती की सफलता काफी हद तक मिट्टी की उर्वरता/सेहत पर निर्भर करती है। आज कई किसान अधिक पैदावार की उम्मीद में बिना मृदा की जांच किए ही केवल ‘अनुमान’ के आधार पर उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग कर रहे हैं, जिससे लागत बढ़ती जा रही है, फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और उपज भी उम्मीद के अनुसार नहीं हो रही है। इसका मुख्य कारण खेत की मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी न होना है। ऐसे में किसानों के लिए मृदा परीक्षण और सही तरीके से मृदा नमूना संग्रहण बहुत आवश्यक हो जाता है।
क्या है मृदा परीक्षण (मिट्टी की जांच)?
मृदा परीक्षण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिससे मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म पोषक तत्व तथा pH की सही जानकारी मिलती है, इस जांच के आधार पर फसल के लिए आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा तय की जाती है, और उसी के अनुसार किसान संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग कर सकते हैं। इससे न केवल लागत कम होती है बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
क्यों जरुरी है मृदा परीक्षण?
- खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की सही जानकारी मिलती है।
- संतुलित उर्वरक प्रबंधन संभव होता है।
- अनावश्यक खाद उपयोग कम होता है, बचत बढ़ती है।
- फसल की पैदावार में वृद्धि होती है।
- मिट्टी की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
सही मृदा नमूना लेने की प्रक्रिया
मिट्टी की जांच की रिपोर्ट तभी सही आती है जब खेत से सही तरीके से मृदा नमूना लिया जाए। यदि नमूना सही नहीं होगा, तो जांच रिपोर्ट भी सही नहीं होगी और किसान को गलत उर्वरक सिफारिश मिल सकती है। इसलिए नमूना लेते समय वैज्ञानिक विधि अपनाना आवश्यक है।
नमूना लेने का सही समय: फसल कटाई के बाद या बुवाई से पहले जैसे खरीफ फसल की बुवाई से पहले अप्रैल–मई के दौरान मिट्टी नमूना लेना सही रहता है।
सटीक रिपोर्ट के लिए: मृदा नमूना संग्रहण की ‘जिग-जैग’ (Zig-Zag) विधि
परीक्षण की सफलता बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि नमूना कैसे लिया गया है। चूंकि खेत की मिट्टी हर स्थान पर समान नहीं होती। कुछ भागों में पोषक तत्व ज्यादा तो कुछ में कम हो सकते हैं। इसलिए जिग-जैग विधि सबसे वैज्ञानिक मानी जाती है इस विधि में जिग-जैग तरीके से घूमते हुए अलग-अलग जगह से मिट्टी ली जाती है, ताकि पूरे खेत में उपलब्ध पोषक तत्वों की सही स्थिति बताने वाला नामुना लिया जा सके।
नमूना लेने का सही तरीका:
- उपकरणों की सफाई: जंग रहित खुरपी या मृदा ऑगर (Auger) का उपयोग करें।
- सफाई: नमूना लेने वाले स्थान से ऊपरी घास-फूस और कंकड़ हटा दें।
- V-आकार का गड्ढा: चुनी गई जगह पर 15-20 सेमी (6 इंच) गहरा V-आकार का गड्ढा खोदें।
- स्लाइस (Slice) लेना: गड्ढे की एक तरफ से 2-3 सेमी मोटी मिट्टी की परत ऊपर से नीचे तक काटें।
- मिश्रण (Quartering Method): खेत के 8-10 अलग-अलग स्थानों से मिट्टी को साफ प्लास्टिक की बाल्टी या साफ कपड़े पर इकट्ठा करें और इसे अच्छी तरह मिलाएं।
- मात्रा का निर्धारण: कुल मिट्टी को गोलाकार फैलाकर चार हिस्सों में बांटें। आमने-सामने के दो हिस्से हटा दें। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक आधा किलो मिट्टी न बच जाए।
- लेबलिंग : इस नमूने को साफ थैली में भरकर उस पर किसान का नाम, गाँव, खेत संख्या एवं फसल का नाम लिखें।

गहराई का चयन :
- सामान्य फसलें: 0–15 सेमी
- गहरी जड़ वाली फसल (कपास, अरहर): 15–30 सेमी
- बागवानी फसलें एवं फलदार वृक्ष: 30 सेमी या अधिक
सटीक परिणाम के लिए कुछ सावधानियां आवश्यक हैं:
- खाद डालने के तुरंत बाद नमूना न लें
- पेड़ों के नीचे से, पानी भरे स्थानों से नमूना न लें
- खाद या गोबर के ढेर के पास से नमूना न लें
- खेत के किनारों/मेड़ों, नालियों या असमान स्थानों से नमूना न लें
- गीली मिट्टी के बजाय हल्की सूखी मिट्टी लें
- साफ एवं जंग रहित उपकरणों का उपयोग करें
मृदा परीक्षण से क्या बदलाव आता है?
मिट्टी की जांच के बाद किसान यह समझ पाते हैं कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और कौन सी खाद कितनी मात्रा में आवश्यक है। इससे जरूरत से अधिक खाद डालने की समस्या कम होती है। संतुलित पोषण मिलने से फसल की बढ़वार अच्छी होती है तथा उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार आता है।
इसके अलावा:
- उर्वरकों पर खर्च कम होता है
- मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनी रहती है
- फसल गिरने एवं पीलापन जैसी समस्याएँ कम होती हैं
- उत्पादन क्षमता अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी हो जाती है
निष्कर्ष
आज जरूरत इस बात की है कि किसान पारंपरिक अनुमान पर आधारित खेती को छोड़ कर वैज्ञानिक खेती को अपनाएँ। इस राह में मृदा परीक्षण और सही तरीके से मृदा नमूना संग्रहण एक छोटा प्रयास है, लेकिन इसका लाभ लंबे समय तक मिलता है। यदि किसान समय-समय पर अपने खेत की मिट्टी की जांच कराएँ और वैज्ञानिक की सलाह के हिसाब से उर्वरकों का उपयोग करें, तो कम लागत में अधिक गुणवत्ता वाली उपज प्राप्त कर सकते हैं तथा मृदा स्वास्थ्य को भी बनाए रख सकते हैं। यह टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
““मिट्टी की जांच का सही ज्ञान, खुशहाल बने किसान”
संदर्भ:
ICAR-IISS. (2021). मृदा परीक्षण एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित उर्वरक उपयोग। भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान (ICAR-IISS), नबीबाग, भोपाल।
RVSKVV. (2022). उन्नत खेती के लिए मृदा नमूना लेने की सही विधि एवं परीक्षण का महत्व। विस्तार शिक्षा निदेशालय, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर (म.प्र.)।
JNKVV. (2020). मृदा परीक्षण: संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की आधारशिला। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.)।
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