छिंदवाड़ा जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण – उप संचालक कृषि श्री नाथ
07 जुलाई 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण – उप संचालक कृषि श्री नाथ – छिन्दवाड़ा/06 जुलाई 2026/ खरीफ सीजन 2026 में जिले में किसानों द्वारा बोनी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस दौरान मुख्य रूप से मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द और धान की फसलों की बुवाई की जाती है। बोनी के समय किसानों को बेसल डोज के लिए एनपीके, डीएपी, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश उर्वरक की आवश्यकता होती है, जबकि टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया का उपयोग किया जाता है।
उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने बताया कि जिले के मार्कफेड के सभी डबल लॉक केंद्रों, सहकारी समितियों तथा निजी प्रतिष्ठानों में किसानों की जरूरत के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण उपलब्ध है। समितियों से उर्वरकों का शीघ्र उठाव सुनिश्चित करने के लिए समिति प्रबंधकों और कृषि विभाग के मैदानी अमले को किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों से अपील की गई है कि सहकारी समितियों के सदस्य समय पर उर्वरकों का उठाव करें, ताकि जिले को अधिक से अधिक उर्वरकों का आवंटन प्राप्त हो सके। वहीं, जो किसान नगद भुगतान कर उर्वरक खरीदना चाहते हैं, वे अपने नजदीकी डबल लॉक केंद्र, मार्केटिंग सोसायटी, एमपी एग्रो अथवा निजी उर्वरक विक्रेताओं से उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं।
वर्तमान में जिले में 20,309 मीट्रिक टन यूरिया, 13,238 मीट्रिक टन एनपीके, 1,191 मीट्रिक टन डीएपी, 13,688 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 3,955 मीट्रिक टन पोटाश उपलब्ध है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में कहीं भी उर्वरकों की कमी नहीं है तथा शासन स्तर से लगातार उर्वरकों की रैक प्राप्त हो रही हैं। आगामी दिनों में जिले को इफको एवं कोरोमंडल की यूरिया रैक भी प्राप्त होने वाली है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

