राज्य कृषि समाचार (State News)

रायसेन जिले में खरीफ फसल हेतु पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध

29 जुलाई 2026, रायसेन: रायसेन जिले में खरीफ फसल हेतु पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध – रायसेन जिले में खरीफ वर्ष 2026 हेतु पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं। कृषि विभाग के उप संचालक श्री केपी भगत ने अद्यतन जानकारी देते हुए बताया कि जिले में खरीफ 2026 हेतु उर्वरक लक्ष्य 137050  मीट्रिक  टन है। जिले में अभी तक यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके तथा एसएसपी को मिलाकर कुल 104870  मीट्रिक  टन उर्वरक प्राप्त  हुआ  है, जिसमें से किसानों को 62328  मीट्रिक  टन खाद का वितरण हो गया है तथा वर्तमान में 42543  मीट्रिक  टन खाद उपलब्ध है। इसमें यूरिया 17567  मीट्रिक  टन, डीएपी 3693  मीट्रिक  टन, एमओपी 3319  मीट्रिक  टन, एनपीके 7357  मीट्रिक  टन तथा एसएसपी 10607  मीट्रिक  टन उपलब्ध है। जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने निरंतर खाद की रैक प्राप्त हो रही हैं।

जिले में स्थित विपणन संघ केन्द्रों पर भी पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता है। विपणन संघ केन्द्रों में कुल यूरिया 6239.786  मीट्रिक  टन, डीएपी 676.05  मीट्रिक  टन तथा एनपीके 4162.55 मीट्रिक  टन उपलब्ध है। इनके अतिरिक्त जिले की सहकारी समितियों में भी कुल यूरिया 5304.571  मीट्रिक  टन, डीएपी 640.15  मीट्रिक  टन तथा एनपीके 1157.5  मीट्रिक  टन उपलब्ध है। जिले के थोक निजी उर्वरक विक्रेताओं के पास यूरिया 791.105  मीट्रिक  टन, डीएपी 38.1 मीट्रिक टन तथा एनपीके 115.75  मीट्रिक  टन उपलब्ध है। जिले के फुटकर निजी उर्वरक विक्रेताओं के पास कुल यूरिया 1998.1  मीट्रिक  टन, डीएपी 135.45  मीट्रिक  टन तथा एनपीके 467.75 मीट्रिक  टन उपलब्ध है। जिले में प्राप्त होने वाली उर्वरक रैक की जानकारी देते हुए बताया कि डीएपी की 995.27  मीट्रिक  टन की रैक जिले को प्राप्त होने वाली है।

 जिले के किसानों से अपील करते हुए उप संचालक कृषि ने कहा कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, किसान भाई अपनी खरीफ फसलों की बौनी हेतु आवश्यकतानुसार फास्फेटिक उर्वरक अथवा एनपीके अपनी सहकारी समिति, निकटतम डबल लॉक केन्द्र अथवा निजी पंजीकृत विक्रेता से क्रय कर सकते हैं। खरीफ फसल की बोनी में आधार खाद के रूप में एनपीके, सुपर फास्फेट का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए क्योंकि डीएपी से दो पोषक तत्व नाइट्रोजन एवं फास्फोरस प्राप्त होते हैं ,जबकि सुपर फॉस्फेट से अतिरिक्त सल्फर तत्व प्राप्त होता है जो तिलहन फसलों के लिए आवश्यक है। एनपीके के उपयोग से एक अतिरिक्त तत्व पोटाश प्राप्त होता है जो फसल के लिए आवश्यक भी है और पौधों को रोग, बीमारी तथा कीटों से भी सुरक्षा प्रदान करता है। दानों में चमक बढ़ाता है तथा वजन में वृद्धि करता है।

 जो किसान भाई स्वयं के बीज का उपयोग कर रहे हैं उनको आवश्यक रूप से बीज उपचार करना चाहिए। बीज उपचार करते समय सबसे पहले फफूंद नाशक जैसे कार्बेन्डाजिम, उसके उपरांत कीटनाशक जैसे थायोमिथाक्साम एवं सबसे अंत में कल्चर जैसे अनाज की फसलों में पीएसबी एवं एजेटोबेक्टर, दलहनी फसलों में पीएसबी एवं राइजोबियम कल्चर से बीज उपचारित करना चाहिए। जो किसान सोयाबीन, मक्का, अरहर, मूंग आदि फसलों की बौनी कर रहे हैं उन्हें मैड नाली पद्धति का उपयोग करना चाहिए।

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