राज्य कृषि समाचार (State News)

इंदौर में अनोखी पहल: खेतों में लग रही ‘कृषि पाठशाला’, किसानों को मिल रहा सीधा प्रशिक्षण

17 अप्रैल 2026, इंदौरइंदौर में अनोखी पहल: खेतों में लग रही ‘कृषि पाठशाला’, किसानों को मिल रहा सीधा प्रशिक्षण – इंदौर जिले के महू जनपद में ग्रामीण विकास और कृषि नवाचार की एक अनोखी पहल देखने को मिल रही है। यहां “कृषि सखियों की पाठशाला” के माध्यम से खेतों को ही कक्षा में बदल दिया गया है, जहां किसान दीदियां स्वयं शिक्षक बनकर अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती, किचन गार्डन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दे रही हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ कम लागत और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करना है।

इस पहल के तहत स्व-सहायता समूह की महिलाएं किसानों को जीवामृत, बीजामृत जैसे जैविक घोल तैयार करना सिखा रही हैं। अब तक 100 से अधिक किसान परिवारों को किचन गार्डन विकसित करने के लिए प्रेरित किया जा चुका है, जिससे उनके घरों में ताजी सब्जियों की उपलब्धता बढ़ी है और खर्च में भी कमी आई है। साथ ही 125 से अधिक खेतों की मिट्टी जांच भी कराई गई है, जिससे किसानों को अपनी भूमि की गुणवत्ता समझने में मदद मिल रही है।

कृषि सखियों की भूमिका बनी अहम

कृषि सखी एवं संध्या सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष पवित्रा निनामा ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ी है और किसान अब रासायनिक खेती के बजाय जैविक विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण भी बढ़ा

यह पहल केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाओं को भी आर्थिक मजबूती मिल रही है। महिलाएं अब कृषि उत्पादों के उपार्जन और विपणन से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं। जिले में 34 प्रोड्यूसर कंपनियों के माध्यम से महिलाएं गेहूं, मूंग और आलू जैसे उत्पादों के व्यापार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

50 से अधिक गांवों में फैल रहा मॉडल

डे-एसआरएलएम इंदौर के जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला के अनुसार अब तक 50 से अधिक गांवों में 100 से ज्यादा कृषि पाठशालाएं संचालित की जा चुकी हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इस मॉडल से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और गांवों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।

जिला पंचायत इंदौर के सीईओ सिद्धार्थ जैन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कृषि सखियों द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण पूरी तरह व्यावहारिक और उपयोगी है। इससे किसानों को सीधे खेतों में सीखने का अवसर मिल रहा है और वे नई तकनीकों को आसानी से अपनाने में सक्षम हो रहे हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements