धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ी सौगात, मध्यप्रदेश में धान पर भी लागू होगी भावांतर योजना
02 जुलाई 2026, भोपाल: धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ी सौगात, मध्यप्रदेश में धान पर भी लागू होगी भावांतर योजना – मध्यप्रदेश के धान उत्पादक किसानों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़ी घोषणा की है। अब प्रदेश में धान की फसल पर भी भावांतर योजना का लाभ मिलेगा। इसके तहत यदि किसानों को बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत मिलती है, तो सरकार एमएसपी और बाजार भाव के बीच का अंतर किसानों के खातों में जमा करेगी। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा सिवनी में आयोजित राज्य स्तरीय धान महोत्सव में की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि इस धरती के वास्तविक शुभंकर हैं। किसानों की खुशहाली ही सरकार का संकल्प है, क्योंकि किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश भी समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि महाकौशल क्षेत्र धान उत्पादन के लिए देशभर में प्रसिद्ध है और अब यहां की छत्रिय धान को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने से इस पारंपरिक धान को वैश्विक पहचान मिली है।
धान पर भावांतर योजना का मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब धान उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ देगी। यदि किसानों को बाजार में एमएसपी से कम दाम मिलता है तो सरकार दोनों कीमतों के बीच का अंतर सीधे उनके खाते में देगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार काम कर रही है।
कोदो-कुटकी किसानों के खातों में भेजी बोनस राशि
धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत प्रदेश के 3,941 किसानों के खातों में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 2 करोड़ 84 लाख रुपये की बोनस राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ बोनस भी दे रही है और पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो-कुटकी की खरीद शुरू की गई है।
श्रीअन्न को मिलेगा नया बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार श्रीअन्न की पूरी वैल्यू चेन विकसित कर रही है। कोदो-कुटकी के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन पर काम किया जा रहा है। ‘नर्मदा मिलेट्स’ ब्रांड के माध्यम से मध्यप्रदेश के श्रीअन्न को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में सरकार ने 40 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी खरीदने का लक्ष्य रखा है। साथ ही डिंडौरी में मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र स्थापित किया जा रहा है। हाल ही में डिंडौरी की सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर को भी जीआई टैग मिला है।
किसानों को खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन अपनाने की सलाह
मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रहें। धान और गेहूं की खेती के साथ फसल विविधीकरण, पशुपालन और मत्स्य पालन को भी अपनाएं। इससे हर महीने आय के नए स्रोत तैयार होंगे और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
विकसित भारत जी-राम-जी योजना के तहत मिलेंगे रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘विकसित भारत जी-राम-जी योजना’ (मनरेगा का नया स्वरूप) के तहत प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के विकास कार्य लगातार कराए जाएंगे। इससे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की जरूरत वाले लोगों को काम मिलता रहेगा और किसी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
संबल योजना के हितग्राहियों को 365 करोड़ रुपये
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) 2.0 योजना के तहत 16,754 से अधिक श्रमिक परिवारों को 365 करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित की। उन्होंने बताया कि संबल योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख रुपये, सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये और स्थायी दिव्यांगता पर 1 लाख रुपये की सहायता दी जाती है। श्रमिक परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा भी मिल रही है।
629 विकास कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री ने सिवनी जिले को 494.16 करोड़ रुपये की लागत वाले 629 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 586 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 43 विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इसके अलावा उन्होंने बालाघाट से सिवनी तक फोरलेन सड़क, छपारा के ग्राम चमारी में शासकीय महाविद्यालय, ग्राम सागर से खटकर तक सड़क निर्माण, छिड़िया पलारी में नगर वन और जिले की प्रत्येक विधानसभा में एक-एक मिनी स्टेडियम बनाने की घोषणा भी की।
यूसीसी पर भी दिया बड़ा बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान’ के संकल्प को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि इसी महीने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए प्रस्ताव लाया जाएगा। हालांकि जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से अलग रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि 10 लाख से अधिक लोगों ने यूसीसी प्रस्ताव का समर्थन किया है।
गेहूं खरीद का रिकॉर्ड, किसानों को मिल रहा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश सरकार ने 13.46 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद की और 2,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भी भावांतर योजना का लाभ दिया गया है। आपदा से प्रभावित किसानों को 2,106 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया है। साथ ही एग्रीटेक सिस्टम के माध्यम से खाद वितरण में गड़बड़ियों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसान कल्याण वर्ष के तहत किसान केवल 5 रुपये में बिजली कनेक्शन ले सकते हैं तथा वर्षाकाल के बाद सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने खेत में की धान की रोपाई
धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं खेत में उतरे और किसानों के साथ धान की रोपाई की। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में मुख्य रूप से सोयाबीन की खेती होती है और धान रोपने का यह उनका पहला अनुभव था। कार्यक्रम के बाद उन्होंने किसान द्वारा घर से लाए गए पारंपरिक भोजन ‘सिदोरी’ का स्वाद भी लिया। साथ ही खेत में प्रकृति, देवी-देवताओं और गौ-माता का पूजन कर आम का पौधा भी लगाया।
किसानों की समृद्धि ही सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं और सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है।
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