राज्य कृषि समाचार (State News)

एमपी में 454 बीज सखियां तैयार, किसानों को मुफ्त मिल रहे देशी बीज

16 मई 2026, भोपाल: एमपी में 454 बीज सखियां तैयार, किसानों को मुफ्त मिल रहे देशी बीज – मध्य प्रदेश में परंपरागत बीजों के संरक्षण और संवर्धन के लिए आजीविका मिशन की कृषि सखियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राज्य सरकार द्वारा इन्हें “बीज सखी” के रूप में प्रशिक्षित किया गया है ताकि देशी बीजों को सुरक्षित रखने और किसानों तक पहुंचाने का काम मजबूत हो सके। प्रदेश में अब तक कुल 454 बीज सखियां तैयार की जा चुकी हैं, जो स्थानीय स्तर पर देशी बीज संरक्षण का कार्य कर रही हैं।

29 जिलों में बने 99 बीज बैंक

राज्य में फिलहाल 29 जिलों में 99 बीज बैंक स्थापित किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 20 बीज बैंक सागर जिले और 10 बीज बैंक बालाघाट जिले में बनाए गए हैं। इन बीज बैंकों के माध्यम से किसानों को पारंपरिक और देशी बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार देशी बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल होते हैं। इन्हें कम पानी, कम खाद और कम कीटनाशकों की जरूरत पड़ती है। साथ ही ये सूखा और रोग प्रतिरोधी होने के कारण खेती को किफायती और टिकाऊ बनाते हैं।

दिया जा रहा विशेष प्रशिक्षण

बीज संरक्षण के लिए बीज सखियों को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पद्मश्री बाबूलाल दहिया, उद्यानिकी विभाग के श्री दीनानाथ धोटे और कृषि विभाग के श्री जितेंद्र सिंह परिहार प्रशिक्षण कार्यक्रम में मार्गदर्शन दे रहे हैं।

इसके अलावा डिंडोरी जिले की फुलझरिया बाई, जो पिछले 16 वर्षों से देशी बीज संरक्षण का कार्य कर रही हैं, भी बीज संरक्षण के पारंपरिक तरीके सिखा रही हैं। कर्नाटक की श्रीमती बी.बी. जान द्वारा भी बीज संरक्षण पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

किसानों को मुफ्त दिए जा रहे देशी बीज

बालाघाट जिले की बीज सखी श्रीमती सुनीता सिहोरे ने बताया कि उन्होंने करीब 70 प्रकार के देशी बीजों का संरक्षण किया है, जिनमें सब्जियां, अनाज और दलहन शामिल हैं। उनके माध्यम से किसानों को नि:शुल्क देशी बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत किसान जितना बीज लेते हैं, फसल उत्पादन के बाद उसका दोगुना बीज वापस बीज बैंक में जमा करना होता है। इससे अन्य किसानों को भी भविष्य में देशी बीज उपलब्ध कराए जा सकेंगे

खरीफ सीजन के लिए किसान कर सकते हैं संपर्क

आगामी खरीफ सीजन में यदि किसान देशी बीजों का उपयोग करना चाहते हैं, तो वे अपने विकासखंड के ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से बीज सखियों की सूची प्राप्त कर संपर्क कर सकते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य देशी बीजों के जरिए किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।

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