छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए 360 नए उपार्जन केंद्र मंजूर, ‘तुंहर टोकन’ ऐप से होगी बुकिंग
03 नवंबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के लिए 360 नए उपार्जन केंद्र मंजूर, ‘तुंहर टोकन’ ऐप से होगी बुकिंग – छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए 360 नए उपार्जन केंद्रों को मंजूरी दी है। इससे राज्य में कुल उपार्जन केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हो गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिया गया यह फैसला 2 लाख से ज्यादा पंजीकृत किसानों को सीधा फायदा पहुंचाएगा। सरकार का मकसद धान बिक्री के दौरान लगने वाली लंबी कतारों, आने-जाने की दूरी और परिवहन खर्च से किसानों को राहत देना है।
यह फैसला इस महीने की शुरुआत में हुई राज्य कैबिनेट बैठक की अगली कड़ी है, जिसमें खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन नीति और कस्टम मिलिंग नीति को मंजूरी दी गई थी। उस बैठक में गन्ना खरीद मूल्य को लेकर भी फैसला लिए जाने की बात सामने आई थी। छत्तीसगढ़ धान उत्पादन के मामले में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है, और राज्य सरकार हर साल धान खरीदी व्यवस्था को और आसान बनाने का दावा करती रही है।
ट्रायल रन के बाद 15 नवंबर से शुरू होगी खरीदी
नए उपार्जन केंद्रों पर 2 से 5 नवंबर तक ट्रायल रन किया जाएगा, ताकि खरीदी शुरू होने से पहले हर व्यवस्था परख ली जाए। इसके बाद 10 नवंबर से किसान टोकन बुकिंग करा सकेंगे।
असली धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 15 जनवरी 2027 तक चलेगी। इस दौरान किसान अपनी उपज तय समर्थन मूल्य पर नजदीकी उपार्जन केंद्र में बेच सकेंगे। ट्रायल रन के दौरान केंद्रों पर कंप्यूटर, इंटरनेट, तौल कांटा और बारदाने जैसी सभी बुनियादी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी, ताकि असली खरीदी शुरू होने पर किसानों को किसी तकनीकी गड़बड़ी का सामना न करना पड़े।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था हर साल राज्य सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहती है, क्योंकि यहां लाखों किसान एक साथ अपनी उपज बेचने पहुंचते हैं। नए केंद्र खुलने से उपार्जन केंद्रों के बीच की औसत दूरी घटेगी, जिससे खासतौर पर दूर-दराज के गांवों के छोटे व सीमांत किसानों को सुविधा होगी।
घर बैठे मिलेगा टोकन, 24 घंटे खुली रहेगी सुविधा
किसानों को अब टोकन के लिए केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे ‘तुंहर टोकन’ नाम के मोबाइल ऐप के जरिए दिन या रात किसी भी समय अपनी बिक्री के लिए टोकन बुक कर सकेंगे। इससे पहले किसानों को अक्सर टोकन लेने के लिए सुबह-सुबह केंद्र पर लाइन लगानी पड़ती थी, जिसमें समय और मजदूरी दोनों खर्च होते थे।
पिछले खरीफ सीजन (2025-26) में इस ऐप के जरिए किसान आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी से पंजीकरण कराते थे और रोज सुबह 8 बजे से नया टोकन आवेदन खुलता था। उस समय रोजाना की कुल खरीद क्षमता का 70 प्रतिशत हिस्सा ऐप से टोकन लेने वाले किसानों के लिए आरक्षित रखा गया था, जिसमें से 80 प्रतिशत हिस्सा छोटे व सीमांत किसानों को और बाकी 20 प्रतिशत बड़े किसानों को दिया जाता था। बचा हुआ 30 प्रतिशत हिस्सा सोसायटी स्तर पर सीधे बांटा जाता था। इस साल भी प्रक्रिया मिलते-जुलते ढांचे पर चलने की उम्मीद है, हालांकि इस सीजन के लिए अलग से विस्तृत निर्देश अभी जारी होना बाकी है।
पिछले खरीफ सीजन में राज्य में 2,740 उपार्जन केंद्रों के जरिए खरीदी हुई थी, जिसमें दूर-दराज के गांवों के किसानों को अक्सर ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी। नए 360 केंद्र जुड़ने से अब यह दूरी घटने और भीड़ कम होने की उम्मीद है। पिछले सीजन में धान खरीदी मार्कफेड के जरिए एग्रीस्टेक/एकीकृत किसान पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से हुई थी, जिसमें अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक उपज खरीदी गई थी और नमी की सीमा 17 प्रतिशत तय थी। इस साल (2026-27) के लिए समर्थन मूल्य की सटीक दर और खरीद सीमा को लेकर अलग से सरकारी अधिसूचना का इंतजार है, इसलिए यहां पिछले साल के आंकड़े सिर्फ संदर्भ के तौर पर दिए गए हैं।
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