रीवा: रबी फसलों में DAP की जगह इस्तेमाल करें ये 5 उर्वरक, गेहूं और चने की खेती के लिए कृषि विभाग की सलाह
03 नवंबर 2026, भोपाल: रीवा: रबी फसलों में DAP की जगह इस्तेमाल करें ये 5 उर्वरक, गेहूं और चने की खेती के लिए कृषि विभाग की सलाह – रबी फसलों की बुआई का समय शुरू हो गया है। रीवा जिले में रबी फसलों की बोनी दिसंबर तक की जाती है। ऐसे में किसानों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज के साथ उर्वरकों का संतुलित और सही मात्रा में उपयोग करना भी जरूरी है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के आधार पर ही खाद का चयन करें। विभाग के अनुसार, केवल अच्छी गुणवत्ता वाला बीज इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं है, यदि उर्वरकों का प्रयोग संतुलित तरीके से नहीं किया गया तो इसका फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
गेहूं और चने के लिए खाद की अनुशंसित मात्रा
कृषि विभाग के अनुसार, सिंचित गेहूं की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 120:60:40 किलोग्राम नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश तत्वों की अनुशंसा की गई है। वहीं, सिंचित पछेती बोनी वाले गेहूं के लिए 80:40:30 और असिंचित गेहूं के लिए 60:30:30 किलोग्राम नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा निर्धारित है। चने की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 20:60:20 किलोग्राम एनपीके के साथ 20 किलोग्राम गंधक का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
DAP के स्थान पर इस्तेमाल कर सकते हैं ये उर्वरक
कृषक सामान्यतः डीएपी और यूरिया का अधिक उपयोग करते हैं। डीएपी की बढ़ती मांग, अधिक कीमत और स्थानीय स्तर पर उपलब्धता की समस्या के कारण किसानों को कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। कृषि विभाग ने इसके विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट (SSP), एनपीके (12:32:16), एनपीके (16:26:26), एनपीके (14:35:14) और अमोनियम फास्फेट सल्फेट के उपयोग की सलाह दी है। इन उर्वरकों का चयन मिट्टी की जरूरत और स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के आधार पर करना चाहिए। विभाग के अनुसार, जहां भारी भूमि में डीएपी का प्रभाव अधिक प्रभावशाली होता है, वहीं हल्की भूमि में एनपीके उर्वरक अधिक कारगर हो सकते हैं।
पोटाश का उपयोग भी है जरूरी
कृषि विभाग के अनुसार, किसान सामान्यतः डीएपी और यूरिया के माध्यम से फसलों को नत्रजन और फास्फोरस तो देते हैं, लेकिन पोटाश उर्वरक का उपयोग नहीं करते। इससे उपज के दानों की चमक और वजन प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान होता है। इसलिए फसल की जरूरत के अनुसार पोटाश सहित सभी आवश्यक पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करना चाहिए।
SSP से मिट्टी की संरचना में होता है सुधार
सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) के इस्तेमाल से भूमि की संरचना में सुधार होता है। इसमें 19 प्रतिशत कैल्शियम और 11 प्रतिशत सल्फर पाया जाता है। यह पाउडर और दानेदार, दोनों रूपों में उपलब्ध होता है। SSP पाउडर का उपयोग खेत की तैयारी के समय किया जाता है, जबकि दानेदार SSP को बुआई के समय बीज के नीचे दिया जा सकता है।
नैनो यूरिया से घट सकती है यूरिया की जरूरत
इफको ने यूरिया के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से होने वाली समस्याओं को कम करने के लिए नैनो तकनीक आधारित नैनो यूरिया (तरल) तैयार किया है। कृषि विभाग के अनुसार, सामान्यतः एक स्वस्थ पौधे में नत्रजन की मात्रा 1.5 से 4 प्रतिशत तक होती है। फसल विकास की अलग-अलग अवस्थाओं में नैनो यूरिया का पत्तियों पर छिड़काव करने से नाइट्रोजन की जरूरत प्रभावी तरीके से पूरी करने में मदद मिलती है। अनुसंधान परिणामों के अनुसार, नैनो यूरिया के उपयोग से फसल की उपज, बायोमास, मृदा स्वास्थ्य और पोषण गुणवत्ता में सुधार के साथ साधारण यूरिया की आवश्यकता 50 प्रतिशत तक कम की जा सकती है। नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की एक बोतल को कम से कम एक यूरिया बैग के बराबर बताया गया है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे स्थानीय उपलब्धता, उर्वरकों की कीमत और खेत की जरूरत का आकलन कर DAP के विकल्प के रूप में SSP, NPK और नैनो यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का उचित उपयोग करें। इससे फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के साथ उर्वरकों का संतुलित प्रबंधन किया जा सकेगा।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


