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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

क्यों गिरे तोतापुरी आम के दाम? कृषि मंत्रालय में हुई अहम चर्चा

23 जुलाई 2026, नई दिल्ली: क्यों गिरे तोतापुरी आम के दाम? कृषि मंत्रालय में हुई अहम चर्चा –  वर्ष 2026 के दौरान आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को कीमतों में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। इस स्थिति से उबरने और तोतापुरी आम की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नीतिगत, तकनीकी और बाजार से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की है।ये निर्णय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लिए गए। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की गई।समिति ने 8 से 10 जुलाई के बीच आंध्र प्रदेश के तिरुपति और चित्तूर जिलों का दौरा कर किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों और स्थानीय प्रशासन से चर्चा की तथा उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन श्रृंखला की चुनौतियों का आकलन किया।

पेय पदार्थों में कम आम गूदे से घटी मांग

विशेषज्ञ समिति के अनुसार इस वर्ष टोटापुरी आम के दाम गिरने का एक प्रमुख कारण घरेलू बाजार में बिकने वाले आम आधारित पेय पदार्थों में प्राकृतिक आम के गूदे (रियल मैंगो पल्प) का कम उपयोग रहा। इसके अलावा प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा समय पर खरीद शुरू नहीं करना और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव भी कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण रहे। इन परिस्थितियों के कारण टोटापुरी आम के गूदे की मांग घटी और सीजन के चरम समय में किसानों को कम कीमत मिली।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई प्रसंस्करण इकाइयां सीजन की शुरुआत में समय पर खरीद नहीं कर सकीं। वहीं बड़ी मात्रा में आम एक साथ मंडियों और प्रसंस्करण इकाइयों में पहुंचने से आपूर्ति बढ़ गई, जिससे कीमतों में अचानक गिरावट आई और किसानों की आय प्रभावित हुई।

आम आधारित पेय पदार्थों के लिए नए मानकों का प्रस्ताव

प्राकृतिक आम के गूदे की मांग बढ़ाने के लिए समिति ने सिफारिश की है कि आम आधारित पेय पदार्थों में 22 से 25 प्रतिशत वास्तविक प्राकृतिक आम का गूदा अनिवार्य किया जाए।समिति ने यह भी सुझाव दिया कि निर्धारित मात्रा में गूदा वाले पेय पदार्थों को 5 प्रतिशत जीएसटी की रियायती श्रेणी में ही रखा जाए, जबकि कम गूदे वाले उत्पादों पर अधिक जीएसटी लगाया जाए। इससे टोटापुरी आम के गूदे की खपत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक गुणवत्तापूर्ण फल आधारित पेय उपलब्ध होंगे।इस प्रस्ताव पर आगे विचार के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने एफएसएसएआई, जीएसटी परिषद, वित्त मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं।

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मूल्य स्थिरीकरण समिति बनाने की सिफारिश

बाजार में बेहतर समन्वय और मूल्य स्थिरता के लिए समिति ने केंद्रीय समन्वय एवं मूल्य स्थिरीकरण समिति गठित करने का सुझाव दिया है।यह समिति प्रत्येक आम सीजन से पहले उत्पादन अनुमान, प्रसंस्करण क्षमता, निर्यात मांग, उत्पादन लागत और बाजार की स्थिति की समीक्षा करेगी। साथ ही किसानों के लिए लाभकारी संकेतात्मक खरीद मूल्य तथा आम के पल्प का संदर्भ मूल्य तय करने में सहायता करेगी, जिससे किसानों और उद्योग दोनों को पहले से स्पष्ट बाजार संकेत मिल सकें।

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पुराने बागों के कायाकल्प पर जोर

समीक्षा में पाया गया कि आंध्र प्रदेश के चित्तूर, तिरुपति, अन्नामय्या और कडप्पा जिलों में टोटापुरी आम के बड़े क्षेत्र में पुराने बाग हैं, जिनकी उत्पादकता और फल की गुणवत्ता लगातार घट रही है।इसे सुधारने के लिए समिति ने टॉप-वर्किंग तकनीक अपनाने की सिफारिश की है। इसके तहत मौजूदा पेड़ों पर अल्फांसो, नीलम, हिमायत और बंगनपल्ली जैसी अधिक मूल्य वाली किस्मों की कलमें लगाई जाएंगी, जिससे दो से तीन वर्षों में बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त की जा सकेगी।समिति ने किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन उद्यान और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP) को व्यापक स्तर पर अपनाने की भी सिफारिश की है।फलों की गुणवत्ता सुधारने और कीटों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के लगभग 23,333 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रारंभिक चरण में फ्रूट बैग (फल आवरण) उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इससे किसानों को प्रीमियम घरेलू बाजारों में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

प्रसंस्करण व्यवस्था और मूल्य संवर्धन पर फोकस

समिति ने राज्य उद्यानिकी विभाग, प्रसंस्करण उद्योग और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रत्येक वर्ष पहले से खरीद योजना तैयार करने की सिफारिश की है।साथ ही आंध्र प्रदेश सरकार को सुझाव दिया गया है कि सभी पंजीकृत प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 15 मई से खरीद और पल्प उत्पादन शुरू करना स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के माध्यम से अनिवार्य किया जाए, ताकि खरीद में देरी के कारण कीमतों में होने वाली गिरावट को रोका जा सके।बैठक में ICAR द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से किसान आधारित प्रसंस्करण और एफपीओ आधारित मूल्य संवर्धन मॉडल पर भी चर्चा हुई। आम की गुठली से मैंगो बटर तथा अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष जोर दिया गया।

निर्यात बढ़ाने के लिए बनेगी नई रणनीति

बैठक में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने टोटापुरी सहित भारतीय आमों के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार का विस्तार करने की योजना प्रस्तुत की। विशेष रूप से समुद्री मार्ग से निर्यात बढ़ाकर परिवहन लागत कम करने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया गया।केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि APEDA, ICAR और राज्य सरकारों के सहयोग से टोटापुरी आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों और ताजे आमों के लिए एक समग्र निर्यात एवं विपणन रणनीति तैयार की जाएगी।उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य टोटापुरी आम की पूरी वैल्यू चेन को किसान-केंद्रित बनाना है। केंद्र और राज्य सरकारें, ICAR, APEDA, किसान उत्पादक संगठन तथा प्रसंस्करण उद्योग मिलकर जीएसटी, खाद्य सुरक्षा मानकों और राज्य सरकारों की नीतियों में बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे। उनका विश्वास है कि इन उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन से टोटापुरी आम उत्पादक किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और वैश्विक बाजार में भारतीय आमों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी।

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