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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

AI और नई तकनीक से मौसम पूर्वानुमान हुआ ज्यादा सटीक, पंचायत स्तर तक पहुंच रही जानकारी: मंत्री जितेंद्र सिंह

07 अगस्त 2026, नई दिल्ली: AI और नई तकनीक से मौसम पूर्वानुमान हुआ ज्यादा सटीक, पंचायत स्तर तक पहुंच रही जानकारी: मंत्री जितेंद्र सिंह – केंद्र सरकार मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को अधिक सटीक, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाने के लिए लगातार आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), हाई-रिजॉल्यूशन संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान (NWP) मॉडल और आधुनिक अवलोकन नेटवर्क के उपयोग से देशभर में मौसम की निगरानी, पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनी सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

मंत्री ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को मजबूत करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाया है। वर्तमान में विभाग के पास मैनुअल वेधशालाएं, स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS), ऑटोमेटेड रेन गेज (ARG), एग्रो-एडब्ल्यूएस, डॉपलर वेदर रडार (DWR), ऊपरी वायु वेधशालाएं और मौसम निगरानी उपग्रहों का व्यापक नेटवर्क उपलब्ध है, जो देशभर में मौसम की लगातार निगरानी कर रहा है।

‘मिशन मौसम’ से पंचायत स्तर तक पहुंचा पूर्वानुमान

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि ‘मिशन मौसम’ के तहत कम, मध्यम और लंबी अवधि के मौसम पूर्वानुमान के लिए कई वैश्विक और क्षेत्रीय एनडब्ल्यूपी मॉडल लागू किए गए हैं। 6 किलोमीटर स्पेशल रिजॉल्यूशन वाले ‘भारत फोरकास्टिंग सिस्टम (भारतएफएस)’ के जरिए पंचायत स्तर के क्लस्टरों के लिए मौसम पूर्वानुमान तैयार किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर मौसम की जानकारी अधिक सटीक मिल रही है।

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उन्होंने बताया कि पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश की लगभग सभी ग्राम पंचायतों को कवर करते हुए पंचायत-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान शुरू किया है। यह जानकारी ई-ग्रामस्वराज, मेरी पंचायत ऐप, ई-मानचित्र और मौसमग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

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AI आधारित मॉडल से बढ़ी पूर्वानुमान की सटीकता

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में पंगु वेदर (Pangu Weather), फोरकास्टनेट (ForecastNet) और ग्राफकास्ट (GraphCast) जैसे तीन एआई-आधारित वैश्विक मॉडल गंभीर मौसम की घटनाओं के पूर्वानुमान में मौसम वैज्ञानिकों की सहायता कर रहे हैं।

इसके अलावा, मौसम वैज्ञानिकों ने निगरानी और अवलोकन प्रणाली के लिए AI और मशीन लर्निंग (ML) आधारित कई स्वदेशी टूल विकसित किए हैं। इनमें नाउकास्टिंग टूल और डाउनस्केल शहरी मौसम पूर्वानुमान प्रणाली शामिल हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

किसानों को सप्ताह में दो बार कृषि-मौसम सलाह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग किसानों के लिए जारी कृषि-मौसम सलाह और आम नागरिकों के लिए नाउकास्ट जैसी सेवाओं की उपयोगिता का नियमित सर्वेक्षण भी करता है। सर्वेक्षण के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक की जाती है, ताकि मौसम सेवाओं को और अधिक प्रभावी तथा उपयोगी बनाया जा सके।

इसके तहत देश के 127 कृषि-जलवायु क्षेत्रों को कवर करने वाली 130 कृषि मौसम विज्ञान क्षेत्र इकाइयां (AMFU) प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को जिला-स्तर पर मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि-मौसम संबंधी सलाह जारी करती हैं। इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी कृषि महत्त्व वाले जिलों में किसानों को वास्तविक समय का मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और प्रारंभिक चेतावनियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

7 दिन का जिला-स्तरीय पूर्वानुमान और मल्टी-प्लेटफॉर्म अलर्ट

उन्होंने बताया कि आईएमडी अपने क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्रों और मौसम विज्ञान केंद्रों के माध्यम से राज्यों के लिए 7 दिन तक का जिला-स्तरीय प्रभाव-आधारित मौसम पूर्वानुमान और जोखिम आधारित चेतावनी जारी करता है। खराब मौसम की स्थिति में चेतावनियां अधिक बार जारी की जाती हैं। मौसम संबंधी जानकारी और चेतावनियों का प्रसार केंद्र और राज्य सरकार की एजेंसियों के समन्वय से मोबाइल ऐप, एपीआई, वेब पोर्टल, एसएमएस, टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से किया जा रहा है।

कृषि ऐप से मिल रही जानकारी

मंत्री ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आम लोगों और किसानों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें मौसम ऐप से मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियां, मेघदूत (MEGHDOOT) ऐप से कृषि-मौसम सलाह, दामिनी (DAMINI) ऐप से बिजली गिरने की चेतावनी तथा उमंग (UMANG) ऐप के माध्यम से देशभर के मौसम पूर्वानुमान और अलर्ट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सेवाओं की उपयोगिता का नियमित मूल्यांकन

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग किसानों के लिए जारी कृषि-मौसम सलाह और आम नागरिकों के लिए नाउकास्ट जैसी सेवाओं की उपयोगिता का नियमित सर्वेक्षण भी करता है। सर्वेक्षण के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सार्वजनिक की जाती है, ताकि मौसम सेवाओं को और अधिक प्रभावी तथा उपयोगी बनाया जा सके।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से मौसम पूर्वानुमान प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है, जिससे किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम नागरिकों को समय पर सटीक जानकारी और चेतावनी उपलब्ध कराई जा रही है।

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