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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

रबी अभियान 2026 का केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया शुभारंभ, केंद्र-राज्य मिलकर बनाएंगे जलवायु-अनुकूल कृषि रोडमैप

29 सितंबर 2026, नई दिल्ली: रबी अभियान 2026 का केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया शुभारंभ, केंद्र-राज्य मिलकर बनाएंगे जलवायु-अनुकूल कृषि रोडमैप – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को दिल्ली में शुरू हुए दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026’ का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्यों से रबी सीजन की तैयारियां केंद्र के साथ तालमेल, वैज्ञानिक योजना और जमीनी निगरानी के साथ पूरी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित बारिश और पानी की कमी जैसी चुनौतियों के बीच डेटा आधारित योजना और केंद्र-राज्य साझेदारी से खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी परिसर, पूसा में आयोजित सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट सहित केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन में राज्यों के कृषि विभागों के प्रधान सचिव, निदेशक स्तर के अधिकारी, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, आईसीएआर संस्थानों के प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), आत्मा के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक शामिल हुए।

जल बजट के आधार पर तय करें फसल

उद्घाटन सत्र में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रबी 2026 आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। सम्मेलन का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल मजबूत करना, कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, स्थिरता सुनिश्चित करना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित रणनीति तैयार करना है।

उन्होंने रबी की तैयारियों में ‘जल बजट’ को सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर बताया। उन्होंने राज्यों और जिलों से सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का आकलन करने को कहा। कम पानी वाले क्षेत्रों में कम पानी मांगने वाली दलहन और तिलहन फसलों को प्राथमिकता देने और जहां सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था है, वहां उसी के अनुसार फसल योजना बनाने पर जोर दिया।

चौहान ने कहा कि इस समय बारिश औसत से कम हुई है, लेकिन पानी की उपलब्धता पर गंभीर असर डालने जितनी कम नहीं हुई है। हालांकि कुछ राज्यों में पानी की कमी चिंता का विषय है। ऐसे क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और मिट्टी में नमी का आकलन कर सिंचाई के लिए पहले से व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी फसल नहीं चुनी जानी चाहिए जिसमें पानी की जरूरत अधिक हो और बाद में पानी उपलब्ध न होने से फसल खराब होने का संकट पैदा हो।

महाराष्ट्र-कर्नाटक में सूखे का होगा आकलन

केंद्रीय मंत्री ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में करीब दो-तिहाई क्षेत्र प्रभावित हैं और राज्य स्तर पर सूखा घोषित किया जा चुका है। कर्नाटक में भी सूखे की स्थिति बनी हुई है। 3 अक्टूबर को केंद्र की टीम कर्नाटक में सूखे का जमीनी आकलन करेगी और महाराष्ट्र में भी केंद्रीय टीम भेजी जाएगी। चौहान ने कहा कि वे स्वयं भी टीम के साथ इन राज्यों का दौरा करेंगे।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी के अनुसार फसल का चयन किया जाना चाहिए। रेनफेड और सिंचित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग योजना बनाने की जरूरत है। उन्होंने समय पर बुवाई पर भी जोर दिया और कहा कि देर से बुवाई होने पर नमी कम होने से अंकुरण और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

बीज की उपलब्धता और वितरण का रोडमैप तैयार करें

शिवराज सिंह चौहान ने बीज को रबी की तैयारी की सबसे अहम कड़ी बताया। उन्होंने राज्यों से अभी से यह तय करने को कहा कि किस क्षेत्र में कौन-सी किस्म उपयुक्त रहेगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में बीज की मांग और उठाव समय पर नहीं होने से वितरण में देरी होती है। कई बार उपयोगी किस्में समय पर किसानों तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने बीज की मांग, उठाव, मिनी किट और वितरण का पूरा रोडमैप तैयार करने को कहा। आईसीएआर के वैज्ञानिकों से अलग-अलग क्षेत्रों और परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्मों का चयन करने और किसानों को नई किस्मों के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया।

दलहन-तिलहन की बुवाई को बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री ने धान के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में दलहन और तिलहन की बुवाई को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने कहा कि इन फसलों में पानी की जरूरत कम होती है और ये आत्मनिर्भरता मिशन के राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी जुड़ी हैं। उन्होंने राज्यों से रबी में दलहन के तहत कितना रकबा लाया जाएगा और चना, मसूर, सरसों जैसी कौन-कौन सी फसलों का लक्ष्य रहेगा, इसकी योजना तैयार करने को कहा। साथ ही किसानों की उपज की समय पर खरीद के लिए बाजार व्यवस्था पहले से तय करने पर जोर दिया।

राज्य नहीं खरीदेंगे तो केंद्रीय एजेंसियां करेंगी खरीद

चौहान ने कहा कि फसल उत्पादन की तैयारी के साथ खरीद की व्यवस्था भी पहले से तैयार होनी चाहिए। अगर राज्य सरकार समय पर खरीद नहीं करती है तो केंद्र की नोडल एजेंसियां नेफेड और एनसीसीएफ सीधे किसानों से खरीद करेंगी। इसके लिए राज्यों को मंडी टैक्स में छूट जैसी जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध करानी होंगी। उन्होंने बताया कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद के लिए केंद्र ने बड़े पैमाने पर प्रस्ताव मंजूर किए हैं। राज्यों से इसका पूरा लाभ उठाने को कहा गया।

संतुलित खाद उपयोग पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जरूरत एक बोरी खाद से पूरी हो सकती है तो दो बोरी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे लागत बढ़ती है और मिट्टी भी प्रभावित होती है। उन्होंने खरीफ में चलाए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ को रबी में भी चलाने की बात कही। इसके तहत संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिकों की टीम की मदद ली जाएगी।

उन्होंने बीज के साथ खाद की उपलब्धता और समय पर वितरण सुनिश्चित करने को कहा। किसान तक खाद पहुंचाने और गड़बड़ी रोकने के लिए फार्मर आईडी के आधार पर किए गए पायलट की व्यवस्था को भी ठीक से लागू करने पर जोर दिया। चौहान ने बताया कि उर्वरक सब्सिडी पर केंद्र सरकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए खर्च कर रही है।

प्राकृतिक खेती के उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए किसानों की रुचि बढ़ रही है और रजिस्ट्रेशन भी बढ़ा है। अब राज्यों को प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सर्टिफिकेशन पर ध्यान देना होगा। उन्होंने आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों ने प्राकृतिक खेती के अपने ब्रांड विकसित किए हैं। उन्होंने प्राकृतिक उत्पादों को बाजार में पहचान दिलाने और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में किसानों को परेशानी न हो, इसकी व्यवस्था करने पर जोर दिया।

किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से करीब 9.54 करोड़ किसान परिवार जुड़े हैं, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड की कवरेज अभी भी कम है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों में। उन्होंने राज्यों से यह आकलन करने को कहा कि किन क्षेत्रों में किसान क्रेडिट कार्ड की कमी है और बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति में कहां दिक्कत आ रही है। उन्होंने फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक के काम में तेजी लाने को कहा, ताकि डिजिटल व्यवस्था के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंच सके।

हर सप्ताह फसल, रोग और बाजार भाव की समीक्षा

चौहान ने राज्यों को हर सप्ताह फसल की स्थिति, बुवाई की प्रगति, अंकुरण, रोगों के हमले और बाजार भाव की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रियल टाइम डेटा के आधार पर निगरानी बढ़ाने से समस्याओं की समय पर पहचान कर उनका समाधान किया जा सकेगा। केंद्र स्तर पर भी फसल, बाजार भाव और रोगों की स्थिति की साप्ताहिक समीक्षा की जा रही है।

जलवायु-अनुकूल और विविधीकृत कृषि पर जोर

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतीश चंद्रा ने रबी सीजन के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बदलते मौसम, असमान वर्षा और रेनफेड क्षेत्रों में नमी से जुड़ी चुनौतियों के बीच कृषि विविधीकरण, सतत खेती और अनुसंधान आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, आधुनिक कृषि अवसंरचना, मजबूत बाजार तंत्र और डिजिटल कृषि समाधानों को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत बताई।

सचिव, डेयर एवं आईसीएआर महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट ने आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल और सतत कृषि, डिजिटल कृषि तथा जोखिम न्यूनीकरण को आगामी रबी अभियान की प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। उन्होंने तिलहन और दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा धान के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में फसल विविधीकरण पर जोर दिया। इसके लिए उपयुक्त फसल और किस्म के चयन से लेकर गुणवत्तापूर्ण बीज, मशीनीकरण, जैविक समाधान और बीज उपचार तक समग्र तकनीकी पैकेज विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने बताया कि आगामी सीजन में छह राज्यों के 37 जिलों में 10,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना है।

29 सितंबर को राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ चर्चा

दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के पहले दिन आत्मनिर्भरता और विविधीकरण, स्थिरता व जलवायु-अनुकूल कृषि तथा डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचा, वित्तपोषण और जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर समूह चर्चा होगी। 29 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श होगा। इसमें रबी मौसम के मौसम पूर्वानुमान, उर्वरक उपलब्धता, डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, दलहन और खाद्य तेल मिशन, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, विपणन सुधार और एटीएमए-केवीके के जरिए योजनाओं की तैयारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन के समापन पर रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने, किसानों को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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