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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसान और मंडी के बीच दूरी हुई कम, अब घर बैठे जानें देशभर की मंडियों का रेट; एगमार्कनेट 2.0 ऐप बना सहारा

18 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: किसान और मंडी के बीच दूरी हुई कम, अब घर बैठे जानें देशभर की मंडियों का रेट; एगमार्कनेट 2.0 ऐप बना सहारा – किसानों को फसलों का सही दाम दिलाने और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार लगातार डिजिटल पहल कर रही है। इसी कड़ी में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2000 से लागू विपणन अनुसंधान एवं सूचना नेटवर्क (एमआरआईएन) योजना के तहत संचालित एगमार्कनेट पोर्टल को तकनीकी रूप से उन्नत कर एगमार्कनेट 2.0 के रूप में विकसित किया गया है। नवंबर 2025 में लॉन्च किए गए इस नए संस्करण ने किसानों और मंडियों के बीच की दूरी को काफी हद तक कम कर दिया है।

4367 मंडियां एगमार्कनेट से जुड़ी

एगमार्कनेट पोर्टल के माध्यम से देशभर की कृषि उपज बाजार समितियों (एपीएमसी) को एकीकृत किया गया है, ताकि किसानों को वास्तविक समय (रियल टाइम) में फसलों के दाम और आवक की जानकारी मिल सके। अब तक देश की 4367 मंडियों को एगमार्कनेट पोर्टल से जोड़ा जा चुका है और नई मंडियों को जोड़ने की प्रक्रिया लगातार जारी है।

खेत से ही दर्ज होगा मंडी डेटा

किसानों और मंडी अधिकारियों की सुविधा के लिए सरकार ने एगमार्कनेट 2.0 मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है। यह ऐप मंडियों में मौके पर ही फसल का डेटा दर्ज करने में सक्षम बनाता है। इसके जरिए किसान अपने मोबाइल फोन पर देशभर की मंडियों के भाव और आवक की जानकारी आसानी से देख सकते हैं, जिससे वे बेहतर विपणन निर्णय ले सकें।

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ई-एनएएम से ऑनलाइन बोली और समय पर भुगतान

ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) किसानों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फसल बेचने की सुविधा देता है। यह एक मांग-आधारित योजना है, जिसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रस्ताव के आधार पर नई मंडियों को जोड़ा जाता है। फिलहाल 1522 मंडियां ई-एनएएम पोर्टल से जुड़ी हुई हैं। ई-एनएएम पर ऑनलाइन बोली प्रक्रिया के माध्यम से उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाता है, वहीं किसानों को ई-भुगतान के जरिए समय पर भुगतान की सुविधा भी मिलती है।

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मोबाइल ऐप से मुफ्त मूल्य सूचना सेवा

ई-एनएएम मोबाइल ऐप के जरिए किसानों को 247 अधिसूचित कृषि उत्पादों के लिए निःशुल्क मोबाइल-आधारित मूल्य सूचना सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा यह ऐप किसानों को नजदीकी ई-एनएएम मंडियों की पहचान करने, वहां के प्रचलित भाव देखने और मंडी तक पहुंचने का मार्ग भी बताता है।

किसानों के फैसले होंगे मजबूत

एगमार्कनेट 2.0 और ई-एनएएम जैसी डिजिटल पहलों से किसानों को अब बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। घर बैठे सही मंडी भाव की जानकारी मिलने से किसान फसल बेचने का सही समय और स्थान तय कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने यह जानकारी बुधवार को लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

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