राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पहलगाम आतंकी हमला: सरकार की परीक्षा की घड़ी

लेखक: मधुकर पवार 

26 अप्रैल 2025, नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमला: सरकार की परीक्षा की घड़ी – 22 अप्रेल का दिन भारत के इतिहास में एक ऐसा काला अध्याय बन गया है जिसकी प्रतिध्वनि लम्बे समय तक भारतीयों के दिलों दिमाग पर छाई रहेगी. पृथ्वी का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने जिस तरह पर्यटकों को अनेक धर्म पूछ – पूछकर उनके परिवारजनों के सामने ही गोली मारकर हत्या कर दी, बेहद दर्दनाक है. इस हत्याकांड की गूंज पूरे विश्व में सुनाई दी और पाकिस्तान को छोड़कर सभी देशों ने इस वीभत्स कांड की न सिर्फ निंदा की बल्कि भारत के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. पहलगाम ने हुए आतंकी हमले के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार के प्रत्येक कदम में साथ देने का आश्वासन दिया है, यह एक शुभ संकेत है. आपको याद होगा जब कुछ साल पहले बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राईक की गई थी तब प्राय: सभी विपक्षी दलों ने सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी. लेकिन इस बार सभी दलों के नेताओं ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है और सरकार के साथ खड़े हैं. इससे आतंकवादियों के मंसूबे भी धरे के धरे रहे गए क्योंकि वे चाहते थे कि धर्म के आधार पर देश का माहौल बिगाड़ा जाए लेकिन वे इसमे कामयाब नहीं हो पाए.

पहलगाम में आतंकी हमला के बाद देश में जबर्दस्त आक्रोश देखा जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तान से बदला लेने की मांग की जा रही है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की एक आमसभा में आतंकवादियों और उन्हें पनाह देने वालों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी. भारत ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सरकार की तरफ से कहा गया कि यह तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता। सरकार ने अटारी बार्डर को बंद करने और पाकिस्तान को सार्क वीजा छूट योजना को समाप्त करने के साथ ही पहले से ही जारी वीजा को रद्द कर दिया है तथा भारत आये पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रेल तक भारत से वापस जाने के लिये कहा हैभारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सरकार की तरफ से कहा गया कि यह तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता। सरकार ने भारत में पाकिस्तान के उच्चायोग में अधिकारियों और कर्मचारियों को संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी है.

समूचा देश भारत सरकार की इस कार्रवाई से खुश तो हैं और इससे भी सख्त कदम उठाने की आशा कर रहे हैं. न्यूज चैनलों के साथ सोशल मीडिया में कई तरह की खबरें प्रसारित हो रही हैं. यूट्यूबर भी अपने व्यू बढ़ाने के चक्कर में भ्रामक खबरें प्रसारित करने से नहीं चूक रहे हैं. ऐसी स्थिति में आम जनता की जिम्मेदारी है कि वह सत्यता को जाने बिना किसी भी समाचार या वीडियो को सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफामों पर न भेजें और भेजने वालों से कहें कि इस तरह के भ्रामक समाचार या वीडियो न बनायें. इसके साथ ही सरकार की भी बड़ी जिम्मेदारी है कि वह सोशल मीडिया पर भ्रामक समाचारों और वीडियो आदि के प्रसारण और प्रकाशन पर कड़ाई से रोक लगाए ताकि राष्ट्रीयता की आड़ में देश का माहौल खराब न हो. वास्तव में सरकार के सामने यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है. एक ओर जहां देशवासियों की भावनाओं की कद्र करना है वहीं दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों पर भी किसी तरह की आंच नहीं आने देना है. हालांकि आतंकवाद के मुद्दे पर प्राय: सभी देश भारत के साथ हैं फिर भी कोई कदम जल्दबाजी में नहीं उठाना चाहिए. जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को जन समर्थन मिल रहा है, यह शुभ संकेत तो है लेकिन दूध का जला छांछ भी फूंक फूंक कर पीता है. इस बात को भी ध्यान में रखना होगा.

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