पद्म पुरस्कार 2026: एग्रीकल्चर क्षेत्र में इन 8 कृषि नायकों को मिला सम्मान, ICAR ने बताया भारतीय खेती का गौरव
28 जनवरी 2026, नई दिल्ली: पद्म पुरस्कार 2026: एग्रीकल्चर क्षेत्र में इन 8 कृषि नायकों को मिला सम्मान, ICAR ने बताया भारतीय खेती का गौरव – खेती-बाड़ी और ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने वाले वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को पद्म पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। कृषि क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाली कुल आठ हस्तियों को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने इन सभी को “भारतीय कृषि का गौरव” बताते हुए कहा कि इनके नवाचारों ने न सिर्फ खेती को टिकाऊ बनाया, बल्कि लाखों किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
इन कृषि नायकों के काम ने फसल विज्ञान, प्राकृतिक खेती, बीज विकास, रेशम उत्पादन, पशुपालन और सहकारी संस्थाओं के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। आइए जानते हैं उन आठ हस्तियों के बारे में, जिन्हें कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म पुरस्कार से नवाजा गया है।
डॉ. ए.के. सिंह: बासमती चावल की 25 उन्नत किस्मों के जनक
चावल और बासमती प्रजनन के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान के लिए डॉ. ए.के. सिंह को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। वह पादप आनुवंशिकी के विशेषज्ञ हैं और लगभग तीन दशकों तक ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) से जुड़े रहे।
IARI के पूर्व निदेशक रहे डॉ. सिंह ने बासमती चावल की 25 उन्नत किस्मों के विकास में अहम भूमिका निभाई। उनकी विकसित किस्मों से हर साल करीब 50 हजार करोड़ रुपये का विदेशी मुद्रा राजस्व अर्जित हो रहा है, जिससे भारत की वैश्विक निर्यात क्षमता मजबूत हुई है।
डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी: लीची उत्पादन में क्रांति
बिहार के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को पारंपरिक ज्ञान आधारित खेती और कृषि विस्तार सेवाओं में योगदान के लिए पद्म श्री मिला है। उन्होंने लीची के पुराने बागानों में कैनोपी मैनेजमेंट तकनीक को अपनाया, जिससे पेड़ों की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और किसानों की आय दोगुनी हो गई।
उन्होंने जल-जमाव वाले इलाकों में मखाना और सिंघाड़े की व्यावसायिक खेती को भी बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से बिहार कृषि नवाचारों का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।
डॉ. के. रामासामी: टिकाऊ और प्राकृतिक खेती के अग्रदूत
तमिलनाडु के डॉ. के. रामासामी को टिकाऊ खेती और किसान-नेतृत्व वाले नवाचारों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, फर्टी-इरिगेशन, बायोगैस और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई।
डॉ. रामासामी ने 30 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं का नेतृत्व किया, जिससे वैज्ञानिक शोध सीधे खेतों तक पहुंचा और किसानों को व्यावहारिक लाभ मिला।
डॉ. प्रेम लाल गौतम: पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षक
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. प्रेम लाल गौतम को पादप आनुवंशिकी, फसल सुधार और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री मिला है। उन्होंने पौधों के आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ भारतीय कृषि शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
श्रीरंग देवबा लाड: कपास उत्पादन में 300% तक बढ़ोतरी
महाराष्ट्र के प्रगतिशील किसान और इनोवेटर श्रीरंग देवबा लाड को कपास खेती में नवाचारों के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उनकी विकसित ‘दादा लाड कपास तकनीक’ से बीज कपास की पैदावार में 300 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई। इस तकनीक से हजारों किसानों की आय में 40 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है।
जोगेश देउरी: मूगा रेशम से संवारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
असम के जोगेश देउरी को जमीनी स्तर पर कृषि और आजीविका सुधार के लिए पद्म श्री मिला है। उन्होंने विश्व-प्रसिद्ध मूगा रेशम के संरक्षण और संवर्धन में अहम योगदान दिया। पारंपरिक रेशम कीट पालन को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर उन्होंने हजारों परिवारों के लिए टिकाऊ आजीविका मॉडल तैयार किया।
रघुपत सिंह: खेती-बाड़ी के पंडित (मरणोपरांत)
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने राजमा की 23 उन्नत किस्में विकसित कीं और लगभग विलुप्त हो चुकी 55 से अधिक सब्जियों की किस्मों को फिर से जीवित किया। उनके शोध से करीब 100 नई पौध प्रजातियां सामने आईं, जिनमें 1.5 मीटर लंबी लौकी भी शामिल है।
राम रेड्डी मामिडी: सहकारी समितियों से बदली ग्रामीण आजीविका (मरणोपरांत)
तेलंगाना के राम रेड्डी मामिडी को पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी ग्रामीण आजीविका प्रणालियों को मजबूत करने के लिए मरणोपरांत पद्म श्री दिया गया है। उन्होंने सहकारी समितियों के जरिए किसानों को प्रशिक्षण दिया और महिला-नेतृत्व वाली संस्थाओं को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया।
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