राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

काला नमक चावल को नई पहचान: उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार, किसानों को मिलेगा बाजार

14 अगस्त 2026, नई दिल्ली: काला नमक चावल को नई पहचान: उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार, किसानों को मिलेगा बाजार – देश में पारंपरिक और विशेष पहचान वाली धान की किस्मों को संरक्षण देने के साथ उनकी खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में काला नमक चावल की उन्नत किस्मों के विकास, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और किसानों को तकनीकी सहयोग देने पर जोर दिया जा रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली पारंपरिक काला नमक लैंडरेस किस्मों के संरक्षण के साथ नई उन्नत किस्में विकसित करने में जुटी है।

काला नमक चावल अपनी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के कारण लंबे समय से अलग पहचान रखता है। अब वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए इसकी खेती को अधिक उत्पादक और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कई उन्नत किस्में खेती के लिए जारी

काला नमक चावल की कई उन्नत किस्में खेती के लिए जारी और अधिसूचित की जा चुकी हैं। इनमें काला नमक KN3, बौना काला नमक 101, बौना काला नमक 102, काला नमक किरण, पूसा नरेन्द्र काला नमक 1 और पूसा सीआरडी काला नमक 2 प्रमुख हैं।

इनमें पूसा नरेन्द्र काला नमक 1 और पूसा सीआरडी काला नमक 2 जैसी बौनी एवं उच्च उपज देने वाली किस्मों की औसत उत्पादकता करीब 4.5 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके मुकाबले पारंपरिक काला नमक किस्मों की औसत उपज लगभग 2.5 टन प्रति हेक्टेयर रहती है। यानी उन्नत किस्मों के माध्यम से किसानों को समान क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।

गुणवत्तापूर्ण बीज पर जोर

काला नमक धान का रकबा बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता को भी महत्वपूर्ण माना गया है। प्रजनक बीज कार्यक्रम के तहत अतिरिक्त बीज की मांग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मांगकर्ता एजेंसियों द्वारा आधार और प्रमाणित बीज के आगे गुणनीकरण के लिए हर वर्ष लगभग 15 से 20 क्विंटल प्रजनक बीज का उत्पादन किया जाता है।वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच काला नमक धान की विभिन्न किस्मों का कुल 389.6 क्विंटल गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार कर किसानों को वितरित किया गया। इससे किसानों तक बेहतर गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाने और उन्नत किस्मों का क्षेत्र बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विदेशी बाजार में भी बढ़ेगी पहुंच

काला नमक चावल को केवल घरेलू बाजार तक सीमित रखने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। APEDA के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार और संभावित रूप से बेहतर मूल्य मिल सकता है।

दरअसल, पारंपरिक कृषि उत्पादों की खास पहचान को आधुनिक अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज और बाजार से जोड़ना किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। काला नमक चावल इसका अच्छा उदाहरण है। यदि उन्नत किस्मों के साथ किसानों को उचित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात बाजार उपलब्ध कराया जाए तो काला नमक चावल न केवल अपनी पारंपरिक पहचान बनाए रख सकता है, बल्कि किसानों के लिए लाभकारी विशेष कृषि उत्पाद के रूप में भी उभर सकता है।

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