राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन: किसानों के लिए नई पहल, खेती को बनाएगा किफायती और टिकाऊ

26 नवंबर 2024, नई दिल्ली: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन: किसानों के लिए नई पहल, खेती को बनाएगा किफायती और टिकाऊ – प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने “राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन” (एनएमएनएफ) की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को मंजूरी दी है। यह योजना 15वें वित्त आयोग (2025-26) तक लागू रहेगी, जिसमें कुल 2,481 करोड़ रुपये का परिव्यय होगा। इसमें 1,584 करोड़ रुपये भारत सरकार और 897 करोड़ रुपये राज्यों का हिस्सा होगा।

क्या है राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ)?

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को एक स्वतंत्र केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य पूरे देश में प्राकृतिक खेती को मिशन मोड में बढ़ावा देना है। यह योजना किसानों को रासायनिक मुक्त खेती अपनाने, स्थानीय संसाधनों का उपयोग करने और खेती की पारंपरिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। प्राकृतिक खेती स्थानीय ज्ञान, स्थान विशेष तकनीकों और कृषि-पारिस्थितिकी सिद्धांतों पर आधारित है।

इस योजना का मुख्य लक्ष्य किसानों की लागत को कम करना, मिट्टी की सेहत सुधारना और सुरक्षित व पौष्टिक खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, यह जैव विविधता को बढ़ाकर जलवायु लचीलापन भी सुनिश्चित करेगी।

मिशन के तहत प्रमुख कदम

  • 15,000 ग्राम पंचायतों में कार्यान्वयन: अगले दो वर्षों में 15,000 ग्राम पंचायतों में यह मिशन लागू होगा। इसका उद्देश्य 1 करोड़ किसानों तक पहुंच बनाना और 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती शुरू करना है।
  • 10,000 जैव-इनपुट संसाधन केंद्र: किसानों को आवश्यक जैव-इनपुट्स की सुविधा प्रदान करने के लिए 10,000 केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
  • 2000 मॉडल प्रदर्शन फार्म: कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से 2,000 मॉडल फार्म बनाए जाएंगे, जहां किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • 30,000 कृषि सखियों की तैनाती: किसानों को जागरूक करने और उन्हें संगठित करने के लिए 30,000 कृषि सखियों और सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को जोड़ा जाएगा।
  • किसानों का प्रशिक्षण: 18.75 लाख किसान “जीवामृत” और “बीजामृत” जैसे जैव उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किए जाएंगे।

प्राकृतिक खेती के लाभ

प्राकृतिक खेती किसानों को खेती की लागत कम करने, बाहरी संसाधनों पर निर्भरता घटाने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करेगी। साथ ही, यह जलवायु जोखिमों जैसे बाढ़ और सूखे से निपटने की क्षमता में सुधार करेगी। इसके अलावा, प्राकृतिक खेती से उत्पन्न उत्पाद किसानों और उपभोक्ताओं के लिए स्वास्थ्यवर्धक और पौष्टिक होंगे।

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मिशन के तहत किसानों को प्राकृतिक कृषि उत्पादों के लिए सरल प्रमाणन प्रणाली और एकीकृत ब्रांडिंग मुहैया कराई जाएगी। इससे किसानों को अपने उत्पादों को बाजार में पहुंचाने में मदद मिलेगी।

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इस योजना के कार्यान्वयन की निगरानी जियो-टैगिंग के माध्यम से ऑनलाइन पोर्टल पर की जाएगी। साथ ही, किसानों के लिए स्थानीय बाजार, एपीएमसी मंडी और हाट जैसे प्लेटफॉर्म पर बाजार संपर्क सुनिश्चित किया जाएगा।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत स्नातक और डिप्लोमा स्तर पर प्राकृतिक खेती पर विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। साथ ही, आरएडब्ल्यूई कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को भी इस मिशन से जोड़ा जाएगा।

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