राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

बारानी खेती के विकास के लिए राष्ट्रीय मंथन, बेहतर परियोजनाओं हेतु गुणवत्तापूर्ण डेटा पर जोर

09 जुलाई 2026, नई दिल्ली:बारानी खेती के विकास के लिए राष्ट्रीय मंथन, बेहतर परियोजनाओं हेतु गुणवत्तापूर्ण डेटा पर जोर – वर्षा सिंचित (बारानी) क्षेत्रों के समग्र विकास और वहां चलने वाली परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा में एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया। इस दौरान विशेषज्ञों, अनुसंधान संस्थानों और विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने बारानी क्षेत्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय डेटा की उपलब्धता को परियोजनाओं की सफलता की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

परामर्श का विषय “भारत के वर्षा सिंचित क्षेत्रों में प्रभावी परियोजना नियोजन एवं कार्यान्वयन के लिए गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों का सृजन एवं प्रसार : बाधाओं को दूर करने हेतु चुनौतियों का समाधान” रखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों को अपनी विशेषज्ञता और उपलब्ध आंकड़ों को साझा करने का मंच देना तथा राज्यों के विभागों को परियोजनाओं के लिए आवश्यक डेटा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा का अवसर उपलब्ध कराना था।

बेहतर योजना और निगरानी के लिए जरूरी है गुणवत्तापूर्ण डेटा

परामर्श में बताया गया कि किसी भी विकास परियोजना की सफलता उसके लिए उपलब्ध सटीक और भरोसेमंद आंकड़ों पर निर्भर करती है। वर्षा, मृदा, भूमि उपयोग, जल संसाधन, फसल प्रदर्शन, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां, जलवायु जोखिम, जलागम क्षेत्रों की विशेषताएं और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े डेटा नीति-निर्माताओं को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार करने में मदद करते हैं। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग, परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और उनके परिणामों का सटीक मूल्यांकन संभव हो पाता है।

सरकारी योजनाओं को प्रभावी बनाने में डेटा की अहम भूमिका

राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि यदि आधारभूत और मानकीकृत आंकड़े आसानी से उपलब्ध हों, तो सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछली योजनाओं के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर वर्तमान योजनाओं को और अधिक परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण डेटा सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सरलता से उपलब्ध होना चाहिए, ताकि बेहतर रणनीतियां बनाकर वर्षा सिंचित क्षेत्रों के सतत विकास को गति दी जा सके। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय परामर्श के माध्यम से राज्यों की वास्तविक जरूरतों और डेटा संबंधी चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।

दो तकनीकी सत्रों में हुई विस्तृत चर्चा

राष्ट्रीय परामर्श के दौरान दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में डेटा संग्रह, भंडारण और उसके प्रसार में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा हुई। इस दौरान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो (NBSS&LUP), बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (BISA-IARI), अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI), महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (MNCFC) तथा केंद्रीय शुष्कभूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) के विशेषज्ञों ने अपने-अपने संस्थानों द्वारा विकसित और संधारित डेटा प्रणालियों की जानकारी साझा की।

राज्यों ने रखीं अपनी चुनौतियां

दूसरे तकनीकी सत्र में परियोजना नियोजन के लिए आवश्यक डेटा और उसे प्राप्त करने में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की गई। इसमें तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, असम, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने डेटा की समय पर उपलब्धता, गुणवत्ता और सुलभ पहुंच से जुड़ी चुनौतियों को सामने रखा तथा इन बाधाओं को दूर करने के लिए सुझाव भी दिए।

सतत विकास को मिलेगी नई दिशा

राष्ट्रीय वर्षा सिंचित क्षेत्र प्राधिकरण का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय डेटा उपलब्ध होने से वर्षा सिंचित क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं की योजना अधिक सटीक ढंग से बनाई जा सकेगी। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और बारानी क्षेत्रों में कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

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