राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मानसून की समीक्षा बैठक: 210 जिलों में अब भी बारिश की कमी, शिवराज ने दिए अहम निर्देश

04 जुलाई 2026, नई दिल्ली: मानसून की समीक्षा बैठक: 210 जिलों में अब भी बारिश की कमी, शिवराज ने दिए अहम निर्देश – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में खरीफ फसलों की बुवाई, मानसून की स्थिति और एल नीनो के संभावित प्रभावों की समीक्षा की। बैठक में वर्षा की कमी वाले जिलों, आकस्मिक (कॉन्टिंजेंसी) योजना के क्रियान्वयन, उर्वरकों की उपलब्धता, खाद्यान्न भंडारण और किसानों से जुड़ी विभिन्न तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया।

210 जिलों में अब भी बारिश की कमी

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को एल नीनो के संभावित प्रभावों पर लगातार और कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गई है। इनमें से 52 जिलों में हाल के दिनों में अच्छी वर्षा हुई है, जबकि 210 जिले अब भी बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं। इनमें 8 ऐसे जिले भी हैं, जहां अब तक नगण्य या बिल्कुल बारिश नहीं हुई है।

अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में बढ़ सकता है मानसून

बैठक में जानकारी दी गई कि 2 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके चलते अगले दो से तीन दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ सकता है। हालांकि, इस वर्ष कुल वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान भी व्यक्त किया गया।

गुजरात और महाराष्ट्र की स्थिति पर भी नजर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर गुजरात के कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी दर्ज की गई है। वहीं महाराष्ट्र में हाल के दिनों में बारिश हुई है, लेकिन जलाशयों का जलस्तर घट रहा है। उन्होंने कहा कि यदि लंबे समय तक बारिश का अंतराल बना रहा तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कॉन्टिंजेंसी प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश

केंद्रीय मंत्री ने प्रत्येक जिले के लिए तैयार किए गए कॉन्टिंजेंसी प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में वर्षा की कमी अधिक है, वहां के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर अब तक की तैयारियों और योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्यों के सहयोग से संभावित मानसूनी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जाएगा।

फसल बीमा और कृषि ऋण कवरेज बढ़ाने पर जोर

बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रभावित जिलों में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और फसल बीमा योजना का अधिक से अधिक किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रयास तेज किए जाएं।

जलाशयों और सूखे की स्थिति की हो रही निगरानी

अधिकारियों ने बताया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम है, जबकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। फसल मौसम निगरानी समूह (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजी) की साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से सूखे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इस कार्य के लिए 15 राज्यों ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।

आईसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्र भी तैयार

बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि राज्यों के साथ जिला स्तर पर आपातकालीन उपायों की समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों की भी हुई समीक्षा

बैठक में दलहन, तिलहन और कपास मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए इन क्षेत्रों में प्रयास तेज करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा बागवानी फसलों की बुवाई, साप्ताहिक मंडी भाव और दलहन, तिलहन, गेहूं एवं चावल के बफर स्टॉक की स्थिति का भी आकलन किया गया।

उर्वरक और बीज की पर्याप्त उपलब्धता

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बीज निगम के पास पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हैं। वहीं अप्रैल से जून 2026 के बीच 176.13 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) उर्वरक की आवश्यकता के मुकाबले 286.37 एलएमटी उर्वरक उपलब्ध रहा। इस पर केंद्रीय मंत्री ने संतोष जताया और विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

चुनौतियों के बीच किसानों के हित सर्वोच्च

बैठक के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2025-26 भारतीय कृषि के लिए बेहद सफल रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद कृषि और किसान कल्याण के लिए लगातार प्रयास जारी रहेंगे। साथ ही कॉन्टिंजेंसी प्लान की नियमित निगरानी और प्रभावित जिलों में किसान क्रेडिट कार्ड तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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