राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

देश में बढ़ा दूध उत्पादन, 247.87 मिलियन टन पहुंचा आंकड़ा; केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

13 अगस्त 2026, नई दिल्ली: देश में बढ़ा दूध उत्पादन, 247.87 मिलियन टन पहुंचा आंकड़ा; केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी देश में दूध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में भारत का कुल दूध उत्पादन बढ़कर 247.87 मिलियन टन पहुंच गया है, जो घरेलू मांग 243 मिलियन टन से अधिक है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पशुधन क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों और सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए यह आंकड़ा साझा किया।

KCC से जुड़े 50.42 लाख पशुपालक

केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने बताया कि पशुपालन करने वाले किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का दायरा भी बढ़ाया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में KCC लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 50.42 लाख हो गई, जबकि वर्ष 2021-22 में यह संख्या 15.08 लाख थी। इससे पशुपालकों को पशुपालन और डेयरी गतिविधियों के लिए ऋण की सुविधा मिलने में मदद मिल रही है।

डेयरी निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर पहुंचा

सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल डेयरी निर्यात 407.18 मिलियन डॉलर रहा। दूध उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर भी सरकार का जोर है।

पशुओं की नस्ल सुधार पर जोर

पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) चला रही है। इसके तहत स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और विकास, पशुओं के आनुवंशिक उन्नयन तथा दूध उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।

वहीं राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के जरिए वैज्ञानिक प्रजनन, चारे की गुणवत्ता में सुधार, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत मांस, बकरी के दूध, अंडे और ऊन के उत्पादन को बढ़ाने के साथ पशुपालकों के लिए नए व्यवसायिक अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर फोकस

पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुरपका-मुंहपका, ब्रुसेलोसिस, PPR और क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण में वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अलावा रोग निगरानी, प्रयोगशालाओं को मजबूत करने और पशुपालकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी सहायता दी जाती है।

सरकार का फोकस पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, पशुपालकों को ऋण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने तथा डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने पर है, ताकि पशुपालन किसानों के लिए आय का बेहतर और स्थायी साधन बन सके।

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