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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत के गेहूँ उत्पादन में गिरावट की संभावना: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

27 अगस्त 2025, नई दिल्ली: भारत के गेहूँ उत्पादन में गिरावट की संभावना: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान – केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत में गेहूँ उत्पादन से जुड़ी उपलब्धियों के साथ-साथ सामने खड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। ग्वालियर में आयोजित गेहूँ और जौ पर राष्ट्रीय परामर्श बैठक में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जल की कमी और बढ़ते तापमान जैसी परिस्थितियाँ आने वाले वर्षों में गेहूँ उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं और यदि समय रहते लचीले कदम नहीं उठाए गए तो उत्पादन घटने की वास्तविक संभावनाहै।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) के आँकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में गेहूँ फसल में मध्यम स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है। बुवाई क्षेत्र 2020-21 में 311.25 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 (तीसरे अग्रिम अनुमान) में 327.61 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो 1.29% CAGR को दर्शाता है। इसी अवधि में उत्पादन 1095.86 लाख टन से बढ़कर 1175.07 लाख टन तक पहुँचा है, जिसमें 1.76% CAGR की वृद्धि हुई है। लेकिन उपज (Yield) की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है—2020-21 में 3521 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में केवल 3587 किग्रा/हेक्टेयर तक पहुँची, जो मात्र 0.46% CAGR है। यह स्थिति इस तथ्य को दर्शाती है कि क्षेत्र और उत्पादन में वृद्धि होने के बावजूद उत्पादकता की गति सीमित रही है।

भारत में गेहूँ फसल का प्रदर्शन (ऑल इंडिया, रबी सीज़न)

वर्षक्षेत्र (लाख हे.)उत्पादन (लाख टन)उपज (किग्रा/हे.)
2020-21311.251095.863521
2021-22304.591077.423537
2022-23314.011105.543521
2023-24318.331132.923559
2024-25*327.611175.073587
CAGR (2020-21 से 2024-25)1.29%1.76%0.46%

स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW); 2024-25 के आँकड़े तीसरे अग्रिम अनुमान पर आधारित

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मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि एक समय भारत को अमेरिका से PL-480 समझौते के तहत गेहूँ आयात करना पड़ता था, लेकिन आज देश दुनिया के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। उन्होंने किसानों, वैज्ञानिकों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी नीतियों को श्रेय दिया, जिनकी वजह से भारत ने रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया है। पिछले दस वर्षों में कुल फसल उत्पादन लगभग 44% बढ़ा है, जिसमें गेहूँ का योगदान उल्लेखनीय रहा है।

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हालांकि चौहान ने चेतावनी दी कि इन स्तरों को बनाए रखना अब कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “गेहूँ कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उत्पादन घटे नहीं।” उन्होंने नई ऐसी किस्में विकसित करने पर जोर दिया जो अधिक तापमान और कम पानी की परिस्थितियों में भी टिकाऊ हों और बेहतर पोषण प्रदान कर सकें। भारत के अनुसंधान संस्थानों ने पहले ही बायोफोर्टिफाइड किस्में विकसित की हैं और ग्लूटेन की मात्रा कम करने पर भी काम कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा, “भारत की खाद्य सुरक्षा इस पर निर्भर करती है कि गेहूँ उत्पादन न केवल स्थिर बना रहे बल्कि जलवायु की अनिश्चितताओं के बावजूद निरंतर बढ़ता रहे।” उन्होंने वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और किसानों से मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

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