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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

समुद्र के रास्ते सिंगापुर पहुंचे भारत के बंगनपल्ली आम, किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

27 जून 2026, नई दिल्ली: समुद्र के रास्ते सिंगापुर पहुंचे भारत के बंगनपल्ली आम, किसानों को मिलेगा बेहतर दाम – भारतीय आम उत्पादकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब भारत के प्रसिद्ध बंगनपल्ली आम हवाई जहाज के बजाय समुद्री मार्ग से भी सुरक्षित रूप से विदेश भेजे जा सकेंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH), लखनऊ और एपीडा (APEDA) द्वारा विकसित नई तकनीक से आम की गुणवत्ता बनाए रखते हुए परिवहन लागत में भारी कमी आई है। इससे किसानों और निर्यातकों दोनों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

हाल ही में आंध्र प्रदेश से 4.3 टन बंगनपल्ली आम रेफ्रिजरेटेड कंटेनर के माध्यम से सिंगापुर भेजे गए। यह खेप 16 दिन की समुद्री यात्रा के बाद भी पूरी तरह ताज़ा और उच्च गुणवत्ता वाली पाई गई।

किसानों को कैसे होगा फायदा?

अब तक आम का निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से होता था, जिस पर ₹150 से ₹250 प्रति किलोग्राम तक परिवहन खर्च आता था। नई समुद्री परिवहन तकनीक से यह खर्च घटकर ₹13 से ₹20 प्रति किलोग्राम रह गया है। परिवहन लागत कम होने से भारतीय आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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30 दिन तक सुरक्षित रहेगा आम

ICAR-CISH द्वारा विकसित प्रोटोकॉल में अवशेष-मुक्त (रेजिड्यू-फ्री) उत्पादन, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAP), वैज्ञानिक तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और बेहतर पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन को शामिल किया गया है।

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निर्यात से पहले आमों का हॉट वॉटर ट्रीटमेंट (HWT) और CISH-मेट वॉश तकनीक से उपचार किया गया, जिससे फलों की शेल्फ लाइफ बढ़ी और बीमारियों का खतरा कम हुआ। इस तकनीक से समुद्री परिवहन के दौरान आम 30 दिन तक सुरक्षित रह सकते हैं।

नए बाजारों के खुलेंगे दरवाजे

इस सफलता के बाद भारत से सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग सहित कई एशियाई देशों में आम का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे बड़े बाजारों में भी भारतीय आमों की पहुंच मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री मार्ग से आम का निर्यात बड़े पैमाने पर शुरू होता है तो परिवहन लागत घटेगी, निर्यात बढ़ेगा और देश के आम उत्पादक किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। यह पहल भारत के बागवानी क्षेत्र को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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