राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)पशुपालन (Animal Husbandry)

पशुपालकों के लिए जरूरी खबर: भारत सरकार ने 18 एंटीबायोटिक समेत 37 दवाओं पर लगाया बैन, नई गाइडलाइन जारी

21 जुलाई 2025, नई दिल्ली: पशुपालकों के लिए जरूरी खबर: भारत सरकार ने 18 एंटीबायोटिक समेत 37 दवाओं पर लगाया बैन, नई गाइडलाइन जारी – भारत सरकार ने पशुपालकों के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब पशुओं के इलाज में कई तरह की दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। खासतौर पर डेयरी पशु, अंडा देने वाले पक्षी और मधुमक्खी पालन में कुछ दवाओं का उपयोग पूरी तरह बैन कर दिया गया है। इस कदम का मकसद पशुओं और इंसानों दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है।

अब इन जानवरों के इलाज में नहीं चलेंगी ये दवाएं

सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, दूध देने वाले पशुओं (गाय-भैंस), अंडा देने वाले पक्षियों, मधुमक्खियों और उन जानवरों (बकरी, भेड़, सुअर) के इलाज में इन दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, जिनसे आंत निकालकर खाद्य या अन्य उत्पाद तैयार होते हैं।

कुल 37 दवाएं बैन

इस नए नियम के तहत कुल 37 दवाओं पर रोक लगाई गई है। इनमें 18 एंटीबायोटिक, 18 एंटीवायरल और 1 एंटी-प्रोटोज़ोन दवा शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल इन पशुओं के किसी भी इलाज, पालन-पोषण, या किसी भी उत्पादन प्रक्रिया में पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

वजन बढ़ाने के लिए दवा देना भी बैन

सरकार ने साफ किया है कि किसी भी जानवर में वजन या उत्पादन बढ़ाने के लिए एंटीमाइक्रोबियल दवाओं (Antimicrobial drugs) का उपयोग करना गैरकानूनी होगा। मतलब अब कोई भी किसान या व्यापारी इन दवाओं से जानवरों का वजन या उत्पादन नहीं बढ़ा सकेगा।

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क्यों लिया गया फैसला?

सरकार का कहना है कि इन दवाओं के अत्यधिक उपयोग से पशुओं में दवा प्रतिरोधक क्षमता (Antibiotic Resistance) बढ़ती है, जो इंसानों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। साथ ही शुद्ध दूध, शहद और मांस का उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए ये कदम उठाया गया है।

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कहां-कहां लागू होगा नियम?

यह आदेश उन सभी फार्म, डेयरी, पोल्ट्री, मधुमक्खी पालन और मीट प्रोसेसिंग यूनिट में लागू होगा, जहां इन जानवरों को पाला जाता है या उनके उत्पाद तैयार होते हैं।

पशुपालकों के लिए सलाह

अगर आप पशुपालन करते हैं तो सावधानी बरतें। किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले पशु चिकित्सक से सलाह जरूर लें। नई नियमावली का पालन करें ताकि आपके उत्पाद सुरक्षित रहें और किसी कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके।

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