राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ICAR का 98वां स्थापना दिवस: 43 नई फसल किस्मों का विमोचन, 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज की पहल; खाद-बीज पर शिवराज का बड़ा बयान  

17 जुलाई 2026, नई दिल्ली: ICAR का 98वां स्थापना दिवस: 43 नई फसल किस्मों का विमोचन, 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज की पहल; खाद-बीज पर शिवराज का बड़ा बयान – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने गुरुवार को नई दिल्ली में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाया। समारोह में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, जलवायु-अनुकूल और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में कई अहम घोषणाएं की गईं। इस अवसर पर 43 नई उन्नत फसल किस्मों, 17 कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित करने की पहल पर भी जोर दिया गया, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच किसानों को टिकाऊ खेती का मॉडल उपलब्ध कराया जा सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं।” उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की जिम्मेदारी केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं, बल्कि उसे खेत तक पहुंचाना भी है। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विज्ञान आधारित, जलवायु-अनुकूल और मांग आधारित कृषि अनुसंधान को और मजबूत करना होगा।

44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित, 94% जलवायु-अनुकूल

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले एक वर्ष में ICAR ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें 94 प्रतिशत किस्में जलवायु-अनुकूल हैं, जबकि 29 किस्में जैव-सुदृढ़ीकृत (बायोफोर्टिफाइड) हैं, जो पोषण सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और प्राकृतिक चुनौतियों के बीच ऐसी किस्में किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित होंगी।

खाद-बीज की गुणवत्ता से समझौता नहीं, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि नकली और घटिया खाद-बीज बेचने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए राज्यों के साथ मिलकर लगातार काम किया जा रहा है।

दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता और मांग आधारित अनुसंधान पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को दलहन और तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए वैज्ञानिकों को किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार अनुसंधान करना होगा। उन्होंने कृषि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, नई तकनीकों के व्यावसायीकरण और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से नवाचारों को गांव-गांव तक पहुंचाने पर भी विशेष बल दिया।

किसानों तक तेजी से पहुंच रही नई तकनीकें

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ, जिसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55 हजार करोड़ रुपये रहा।

उन्होंने बताया कि ICAR की विकसित तकनीकें लगभग एक करोड़ किसानों तक सीधे पहुंचीं, जबकि मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों तक इनका प्रसार हुआ। इसके अलावा 18 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के जरिए वैश्विक सहयोग को भी मजबूत किया गया।

नई तकनीकों और फसल किस्मों का हुआ विमोचन

स्थापना दिवस के अवसर पर 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 नई कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। प्रमुख तकनीकों में जलवायु-अनुकूल एवं लवणीय-क्षारीय मिट्टी के लिए उपयुक्त धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन रोग एटलस और लघु किसानों के लिए किफायती कसावा हार्वेस्टर शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य किसानों की लागत कम करना, उत्पादकता बढ़ाना और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाना है।

72 एमओयू से तकनीकें तेजी से पहुंचेंगी किसानों तक

कार्यक्रम के दौरान कृषि प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इससे ICAR द्वारा विकसित तकनीकों का किसानों तक तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित होगा। साथ ही 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देकर उनकी सेवाओं का नियमितीकरण भी किया गया।

इन नेताओं ने भी रखे अपने विचार

समारोह में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से अनुसंधान और तकनीकों को किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक तेजी से पहुंचाने पर जोर दिया। कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि खाद्य संकट से आत्मनिर्भरता तक की भारत की यात्रा वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। वहीं राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र की उपलब्धियां ग्रामीण समृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई, नैनो उर्वरक, कृत्रिम गर्भाधान और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

ICAR ने स्थापना दिवस के अवसर पर एक बार फिर स्पष्ट किया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिषद विज्ञान आधारित अनुसंधान, रणनीतिक साझेदारियों, जलवायु-अनुकूल तकनीकों और किसान-केंद्रित नवाचारों के माध्यम से देश की कृषि को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार काम करती रहेगी।

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