ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026: शिवराज सिंह ने कहा- ‘विज्ञान से किसान तक’ पहुंचे हर नई तकनीक
16 जुलाई 2026, नई दिल्ली: ICAR CSR कॉन्क्लेव 2026: शिवराज सिंह ने कहा- ‘विज्ञान से किसान तक’ पहुंचे हर नई तकनीक – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, NASC कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में आयोजित ‘कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कॉन्क्लेव 2026’ में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कॉर्पोरेट जगत से कृषि, किसानों और ग्रामीण विकास के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में होने वाले अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि हर नई तकनीक और नवाचार सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि “विज्ञान से किसान तक” की यात्रा जितनी तेज होगी, उतना ही देश का कृषि क्षेत्र मजबूत होगा।
CSR को बताया ‘ट्रस्टीशिप’ की भावना का विस्तार
अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने महात्मा गांधी के ‘ट्रस्टीशिप’ सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों के पास अधिक संसाधन और संपत्ति है, वे उसके मालिक नहीं बल्कि समाज के ट्रस्टी हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग, व्यापार और कंपनियां जो कमाई करती हैं, उसका एक हिस्सा समाज, किसानों और देश के विकास के लिए समर्पित करना ही CSR की मूल भावना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी से संसाधन छीनने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि लोगों की क्षमता और प्रतिभा को अवसर देकर उन्हें आगे बढ़ाने की पक्षधर है। जब उद्योग आगे बढ़ेंगे और समृद्ध होंगे, तब वे अपनी कमाई का हिस्सा समाज के कल्याण और कृषि विकास में निवेश कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि कई उद्योगपति बिना किसी कानूनी बाध्यता के भी समाज सेवा में योगदान देते रहे हैं, जबकि CSR कानून ने इस सोच को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है।
रिसर्च लैब से निकलकर किसानों के खेत तक पहुंचे तकनीक
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार नई-नई तकनीकें और किस्में विकसित हो रही हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब ये किसानों तक समय पर पहुंचें। उन्होंने “विकसित कृषि संकल्प अभियान” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान के माध्यम से वैज्ञानिकों को गांव-गांव जाकर किसानों को नई तकनीकों, उन्नत बीजों और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी देने का लक्ष्य दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट जगत इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि निजी क्षेत्र अनुसंधान के व्यावसायीकरण और तकनीकों के प्रसार में सहयोग करे तो देश के करोड़ों किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक तेजी से पहुंचाई जा सकती है।
जूट क्षेत्र का उदाहरण देकर समझाई तकनीक की जरूरत
शिवराज सिंह चौहान ने जूट उत्पादन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जूट का रेशा निकालने के लिए उसे करीब 25 दिनों तक पानी में भिगोकर रखना पड़ता था, जिससे पानी की अधिक आवश्यकता होती थी और गुणवत्ता भी प्रभावित होती थी। अब वैज्ञानिकों ने ऐसी आधुनिक मशीनें विकसित की हैं जो कम समय में बेहतर गुणवत्ता का रेशा निकाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकों का जल्द से जल्द व्यावसायीकरण होना चाहिए ताकि किसान उनका लाभ उठा सकें। यह कार्य केवल सरकारी संस्थानों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।
जलवायु अनुकूल और टिकाऊ कृषि पर दिया जोर
केंद्रीय मंत्री ने कॉन्क्लेव के दौरान चर्चा किए गए प्रमुख विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन के बीच कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना है। उन्होंने कहा कि जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और सुरक्षित खाद्य उत्पादन जैसे क्षेत्रों में CSR निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने मिट्टी में लगातार घटते ऑर्गेनिक कार्बन और बिना परीक्षण के रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो कृषि भी मजबूत रहेगी। ऐसे में मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं को CSR के माध्यम से और प्रभावी बनाया जा सकता है।
“फूड ऐज मेडिसिन” की अवधारणा पर दिया बल
शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय परंपरा की “फूड ऐज मेडिसिन” यानी भोजन ही औषधि है, की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल अधिक उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसा भोजन पैदा करना भी जरूरी है जो लोगों को स्वस्थ बनाए।
उन्होंने कहा कि मौसमी, संतुलित और पौष्टिक भोजन की संस्कृति को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन के साथ-साथ खाद्य गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
स्टार्टअप, ड्रोन और एग्री-टेक में CSR निवेश बढ़ाने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि CSR के माध्यम से कृषि क्षेत्र में अनेक नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने एग्री-टेक स्टार्टअप्स, कृषि प्रशिक्षण संस्थानों, ड्रोन पायलटों के प्रशिक्षण, एग्री-बिजनेस लीडर्स तैयार करने, फूड प्रोसेसिंग और आधुनिक कृषि उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज का युवा खेती छोड़ना नहीं चाहता, बल्कि यदि उसे आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बेहतर अवसर मिलें तो वह कृषि को ही अपना करियर बना सकता है। ऐसे में CSR इस बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों को मिले प्राथमिकता
शिवराज सिंह चौहान ने महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि “ड्रोन दीदी” जैसी पहल महिलाओं को कृषि क्षेत्र में नई पहचान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूह कृषि आधारित उत्पादों, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि CSR योजनाओं में महिला किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिला उद्यमियों को विशेष प्राथमिकता दी जाए, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत हो सके।
CSR को केवल कानूनी दायित्व नहीं, नैतिक जिम्मेदारी समझें
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानून के तहत कंपनियों के लिए अपने मुनाफे का 2 प्रतिशत CSR गतिविधियों पर खर्च करने का प्रावधान है, लेकिन इसे केवल कानूनी बाध्यता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समाज के प्रति उद्योग जगत की नैतिक जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव में विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों ने कृषि और ग्रामीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये वादे केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देंगे। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि “जीना उसका जीना है, जो औरों को जीवन देता है”, इसलिए सभी को अपनी क्षमता के अनुसार समाज और किसानों के विकास में योगदान देना चाहिए।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
ICAR द्वारा आयोजित CSR कॉन्क्लेव 2026 में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कॉर्पोरेट जगत के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, अधिकारी तथा देशभर से आए किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान, नवाचार, जलवायु अनुकूल खेती, ग्रामीण विकास और कॉर्पोरेट भागीदारी को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई।
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