Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कम जमीन में ज्यादा कमाई कैसे करें? दो दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों को सिखाई गई आधुनिक तकनीक  

02 फरवरी 2026, नई दिल्ली: कम जमीन में ज्यादा कमाई कैसे करें? दो दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों को सिखाई गई आधुनिक तकनीक – पश्चिम चंपारण के किसानों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (28–29 जनवरी 2026) ने यह साफ कर दिया कि अब खेती सिर्फ ज्यादा जमीन या ज्यादा खर्च पर निर्भर नहीं है। सीमित भूमि और संसाधनों के बावजूद भी किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अच्छी और नियमित कमाई कर सकते हैं। यह प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना, तथा कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें जिले के 200 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

अब खेती सिर्फ धान-गेहूं तक सीमित नहीं

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को बताया गया कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए केवल धान या गेहूं पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और जैविक खाद निर्माण जैसे कार्यों को खेती के साथ जोड़कर सालभर आमदनी प्राप्त की जा सकती है। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर किसान जोखिम कम कर सकते हैं और आय बढ़ा सकते हैं।

बदलते मौसम में सुरक्षित खेती के तरीके

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि बदलते मौसम और बाजार की अनिश्चितता के बीच खेती को सुरक्षित कैसे बनाया जा सकता है। फसल विविधीकरण, कम पानी वाली फसलों का चयन, जैविक खाद का उपयोग और आधुनिक यंत्रों से खेती करने पर विशेष जोर दिया गया। किसानों ने महसूस किया कि सही जानकारी और तकनीक से खेती को नुकसान से बचाया जा सकता है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

वैज्ञानिक तकनीक अपनाने से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

समापन समारोह के मुख्य अतिथि श्री आर.के. तिवारी, प्रबंधक, मगध शुगर मिल, बेतिया ने कहा कि जब किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, तभी उनकी आमदनी बढ़ती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। उन्होंने बताया कि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से किसानों को बाजार से जोड़ना आसान होता है और उपज का सही मूल्य मिल सकता है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

खेती में विविधता ही सफलता की कुंजी

कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष (फसल अनुसंधान) ने कहा कि खेती में विविधता ही स्थायित्व की सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने बताया कि समेकित कृषि प्रणाली किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम है और इससे जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

धान-गेहूं से आगे सोचने की जरूरत

संयोजक डॉ. शिवानी, प्रधान वैज्ञानिक ने किसानों को बताया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में केवल धान और गेहूं की खेती करना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने किसानों को दलहन, तिलहन, सब्जी और चारा फसलों को अपनाने की सलाह दी, जिससे कम समय में अधिक आमदनी संभव हो सके।

किसानों को दिए गए कृषि उपकरण

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पावर स्प्रेयर, नैपसैक स्प्रेयर, वर्मी बेड और कुदाल जैसे कृषि आदान भी वितरित किए गए। इससे फसल सुरक्षा, रोग-कीट नियंत्रण और जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशिक्षण से किसान बने आत्मविश्वासी

डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह, प्रधान, कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर ने कहा कि किसानों की सफलता ही ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रशिक्षण से जुड़े किसान आने वाले समय में अपने गांवों में अन्य किसानों के लिए उदाहरण बनेंगे।

यह दो दिवसीय प्रशिक्षण किसानों के लिए सिर्फ जानकारी का माध्यम नहीं, बल्कि यह समझने का अवसर भी बना कि कम जमीन में भी आधुनिक तकनीकों के जरिए खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। 

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture