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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मत्स्य पालन क्षेत्र ने पकड़ी रफ्तार, भारत का समुद्री निर्यात 72 हजार करोड़ के पार पहुंचा  

22 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: मत्स्य पालन क्षेत्र ने पकड़ी रफ्तार, भारत का समुद्री निर्यात 72 हजार करोड़ के पार पहुंचा – प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने में भारत का मत्स्यपालन क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आजीविका सुरक्षा और राष्ट्रीय विकास में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार मछली पालकों के जीवन स्तर में सुधार पर लगातार काम करती रहेगी और एक जीवंत एवं मजबूत मत्स्यपालन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसी दृष्टि से भारत सरकार ने मत्स्यपालन और जलीय कृषि को मजबूत करने, मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण करने और समुद्री खाद्य निर्यात को विस्तार देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में मत्स्य विभाग ने इस क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए कई पहलें की हैं। इनमें 39 देशों के राजनयिकों और एडीबी, एफएओ, जेआईसीए जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी के साथ समुद्री खाद्य निर्यात पर गोलमेज सम्मेलन शामिल है। इसके साथ ही अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में निवेशक सम्मेलन आयोजित कर निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

समुद्री खाद्य निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
भारत के मत्स्यपालन क्षेत्र की पहल और सुधारों का परिणाम समुद्री खाद्य निर्यात में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एमपीईडीए के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री खाद्य निर्यात रिकॉर्ड 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है, जबकि निर्यात की मात्रा 19.32 लाख मीट्रिक टन रही।

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फ्रोजन झींगा इस वृद्धि का सबसे बड़ा चालक रहा, जिसने अकेले 47,973.13 करोड़ रुपये का योगदान दिया और कुल निर्यात आय में दो-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी दर्ज की। झींगा निर्यात में मात्रा और मूल्य दोनों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जिससे भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति और मजबूत हुई है।

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नए बाजारों में बढ़त से मिली रफ्तार

अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है, लेकिन वहां शिपमेंट में गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में मजबूत वृद्धि ने इस कमी की भरपाई कर दी है। चीन को निर्यात में मूल्य और मात्रा दोनों में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जबकि यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी तेज उछाल देखने को मिला है।

जापान में भी निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पश्चिम एशिया में मामूली गिरावट रही। कुल मिलाकर, भारत ने पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़ते हुए नए और वैकल्पिक बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है।

उत्पाद और लॉजिस्टिक्स में सुधार
उत्पाद श्रेणी में फ्रोजन मछली, स्क्विड, कटलफिश, सूखे खाद्य पदार्थ और जीवित उत्पादों के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं लॉजिस्टिक्स के मामले में विशाखापट्टनम, जेएनपीटी, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों का योगदान कुल निर्यात मूल्य का लगभग 64 प्रतिशत रहा है, जो इस क्षेत्र की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को दर्शाता है।

नीतिगत सुधार और वैश्विक विस्तार
सरकार ने निर्यात विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए कई नीतिगत कदम भी उठाए हैं। इसमें 211 नए निर्यात प्रतिष्ठानों की मंजूरी, राष्ट्रीय ट्रेसेबिलिटी फ्रेमवर्क 2025 का शुभारंभ और ईईजेड नियमों का अधिसूचन शामिल है। इन प्रयासों से भारतीय समुद्री उत्पादों की गुणवत्ता, निर्यात क्षमता और वैश्विक स्वीकार्यता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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