धान की परती जमीन पर दलहन-तिलहन उगाएं किसान: केवीके रामगढ़ दौरे पर बोले भाकृअनुप डीजी डॉ. एम.एल. जाट
14 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: धान की परती जमीन पर दलहन-तिलहन उगाएं किसान: केवीके रामगढ़ दौरे पर बोले भाकृअनुप डीजी डॉ. एम.एल. जाट – भाकृअनुप के सचिव एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने किसानों को धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन पर दलहन और तिलहन की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी में उपलब्ध अवशिष्ट नमी के अनुसार रबी फसलों की खेती करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। डॉ. जाट ने यह बात भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिसर के अंतर्गत केवीके रामगढ़ के दौरे के दौरान कही। इस दौरान उनके साथ भाकृअनुप के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव भी मौजूद रहे।
किसानों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने पर जोर
दौरे के दौरान डॉ. जाट ने केवीके रामगढ़ की गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने किसानों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण आयोजित करने, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और किसान-केंद्रित प्रसार गतिविधियों को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणालियों (आईएफएस) को बढ़ावा देने और धान की परती भूमि का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने की आवश्यकता भी बताई। केवीके रामगढ़ की ओर से इस अवसर पर किसानों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें क्षेत्र भ्रमण, कृषि प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी और महत्वपूर्ण कृषि आदानों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना और किसानों की आजीविका में सुधार करना था।
धान की परती भूमि से बढ़ सकती है किसानों की आय
डॉ. जाट ने कहा कि धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन को उत्पादक खेती के अंतर्गत लाने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा और किसानों को अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने विशेष रूप से दलहन और तिलहन जैसी रबी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) को भी किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। इसके तहत स्थानीय संसाधनों और परिस्थितियों के अनुसार फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन और बागवानी जैसी गतिविधियों को जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा मशरूम उत्पादन और सिलाई जैसी पूरक आजीविका गतिविधियों को अपनाकर सालभर आय के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए बनेगी किसान-अनुकूल पुस्तिका
किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम के दौरान डॉ. जाट ने किसानों से बातचीत की और नवोन्मेषी एवं प्रगतिशील किसानों को संसाधन व्यक्तियों के रूप में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे किसान अपने सफल कृषि प्रयोगों और खेतों में अपनाई गई बेहतर पद्धतियों के अनुभव दूसरे किसानों के साथ साझा कर सकते हैं। उन्होंने सरकारी सहायता कार्यक्रमों तक किसानों की पहुंच आसान बनाने के लिए सरल और किसान-अनुकूल पुस्तिका विकसित करने पर भी जोर दिया। इसमें विभिन्न योजनाओं के पात्रता मानदंड, मिलने वाले लाभ और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी शामिल करने की बात कही गई, ताकि किसान उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकें।
किसानों ने साझा किए अनुभव, छात्राओं से भी की बातचीत
रामगढ़ जिले के प्रगतिशील किसानों ने डॉ. जाट के साथ अपने अनुभव साझा किए और केवीके रामगढ़ से मिले सहयोग एवं तकनीकी मार्गदर्शन की सराहना की। दौरे के दौरान डॉ. जाट ने केवीके परिसर में एक फलदार पौधा भी लगाया। यह गतिविधि पर्यावरण संरक्षण और बागवानी विकास के महत्व से जुड़ी रही। कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने गीत और नृत्य के माध्यम से अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया। डॉ. जाट ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी करियर संबंधी आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली और उन्हें आत्मविश्वास एवं समर्पण के साथ अपने शैक्षिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस दौरे के माध्यम से भाकृअनुप ने किसान-केंद्रित कृषि अनुसंधान एवं प्रसार, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग और छोटे किसानों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर विकसित करने पर जोर दिया।
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