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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत और घाना के बीच कृषि अनुसंधान में पांच साल के सहयोग का समझौता

12 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: भारत और घाना के बीच कृषि अनुसंधान में पांच साल के सहयोग का समझौता – भारत और घाना के बीच कृषि अनुसंधान, शिक्षा और तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में पांच साल के सहयोग को लेकर एक समझौता हुआ है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और घाना के CSIR-क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के बीच हुए इस समझौता ज्ञापन (MoU) की जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 6 अक्टूबर को दी।

यह समझौता जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान हुआ, जो घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुद्ज़ेटो अबलाकवा की मौजूदगी में संपन्न हुआ। उसी दिन जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा से भी मुलाकात की। यह यात्रा घाना, कोटे डी आइवर और इथियोपिया के तीन देशों के दौरे का पहला चरण है, जो 6 से 10 अक्टूबर तक चला।

टमाटर और कंद फसलों पर होगा खास काम

समझौते के मुताबिक ICAR घाना में सब्जी फसलों, खासकर टमाटर, पर काम करेगा। भारत की उच्च उपज वाली टमाटर किस्मों को वहां पहुंचाने और पहले से आजमाई जा चुकी खेती तकनीकों के विस्तार में मदद दी जाएगी। टमाटर घाना में एक महत्वपूर्ण सब्जी फसल है और इसकी घरेलू पैदावार बढ़ाना वहां की सरकार की प्राथमिकता रही है।

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कसावा और याम जैसी कंद फसलों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी समझौते में जोर दिया गया है। पश्चिम अफ्रीका में यह दोनों फसलें खाद्य सुरक्षा का अहम हिस्सा मानी जाती हैं।

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फसल कटाई के बाद के प्रबंधन में भी तकनीकी मदद मिलेगी, जिसमें कोल्ड स्टोरेज और रेफ्रिजरेटेड परिवहन में क्षमता निर्माण शामिल है। इसके अलावा दोनों देशों के वैज्ञानिकों और जर्मप्लाज़्म, यानी आनुवंशिक संसाधनों, का आदान-प्रदान भी समझौते का हिस्सा होगा।

क्रियान्वयन पर नजर रखेगा संयुक्त कार्यदल

समझौते पर अमल की निगरानी के लिए भारत और घाना मिलकर एक संयुक्त कार्यदल (जॉइंट वर्किंग ग्रुप) बनाएंगे। यह कार्यदल समय-समय पर दोनों संस्थानों के बीच हो रहे काम की समीक्षा करेगा और आगे की दिशा तय करेगा।

जयशंकर की इस यात्रा के दौरान कृषि क्षेत्र के अलावा भी कई समझौते हुए। भारतीय जूलॉजिकल सर्वे और घाना विश्वविद्यालय के बीच अकादमिक गतिविधियों, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण में सहयोग का एक अलग समझौता भी हुआ।

दोनों विदेश मंत्रियों ने व्यापार, निवेश, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर भी बातचीत की। चर्चा में अफ्रीकी संघ और पश्चिम अफ्रीकी आर्थिक समुदाय (ECOWAS) के साथ भारत के बढ़ते जुड़ाव का विषय भी शामिल रहा।

भारत पिछले कुछ वर्षों में अफ्रीकी देशों के साथ कृषि क्षेत्र में सहयोग को दक्षिण-दक्षिण साझेदारी के अहम हिस्से के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले भी भारत ने भूटान समेत कुछ अन्य देशों के साथ कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग के समझौते किए हैं। ICAR के पास धान, गेहूं, दलहन और सब्जियों की कई उच्च उपज वाली किस्मों के विकास का दशकों का अनुभव है, जिसे अब अफ्रीकी देशों के साथ साझा करने की दिशा में काम बढ़ रहा है।

भारतीय बीज कंपनियों और कृषि तकनीक उद्यमों के लिए भी ऐसे समझौते दीर्घकाल में नए निर्यात अवसर खोलते हैं, क्योंकि शोध सहयोग के बाद अक्सर बीज और तकनीक की आपूर्ति के व्यावसायिक रास्ते भी खुलते हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के बीच जर्मप्लाज़्म, यानी बीज और पौध सामग्री में मौजूद आनुवंशिक गुणों का आदान-प्रदान किसी भी फसल सुधार कार्यक्रम की बुनियाद होता है। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों को एक-दूसरे की जमीन और मौसम के हिसाब से ढली किस्मों पर शोध करने का मौका मिलता है।

घाना में टमाटर की खेती छोटे किसानों की आजीविका का बड़ा हिस्सा है, लेकिन कीट-रोग और भंडारण की कमी की वजह से वहां फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान अक्सर ज्यादा रहता है। भारत के पास टमाटर, कसावा से जुड़ी फसलों और कंद फसलों के भंडारण तथा प्रसंस्करण की तकनीकों में लंबे समय का अनुभव है, जिसे अब साझा किया जाना है।

जयशंकर की तीन देशों की इस यात्रा का अगला पड़ाव कोटे डी आइवर और इथियोपिया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत के कूटनीतिक और आर्थिक जुड़ाव को व्यापक बनाने की कड़ी में है, जिसमें कृषि सहयोग एक अहम स्तंभ के तौर पर शामिल है। आने वाले महीनों में इस समझौते के तहत बनने वाले संयुक्त कार्यदल की पहली बैठक कब होगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

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