राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ड्राईलैंड कांग्रेस 2026: शुष्क भूमि बनेगी किसानों की ताकत, शिवराज चौहान ने बताया बदलाव का रास्ता

11 सितंबर 2026, नई दिल्ली: ड्राईलैंड कांग्रेस 2026: शुष्क भूमि बनेगी किसानों की ताकत, शिवराज चौहान ने बताया बदलाव का रास्ता – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुष्क भूमि कृषि में बदलाव लाने के लिए विज्ञान, नीति और बाजार समर्थन पर आधारित समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शुष्क भूमि को कमजोरी नहीं समझना चाहिए। सही वैज्ञानिक उपायों, नीतियों और बाजार के सहयोग से शुष्क भूमि भारत सहित अन्य क्षेत्रों के लिए ताकत का स्रोत बन सकती है। शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में ‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि व्यवस्था में बदलाव के प्रयासों में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की समृद्धि को केंद्र में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सफलता का पैमाना केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान समुदायों की बेहतर आजीविका और समृद्धि भी होना चाहिए।

25 से ज्यादा देशों के 800 से अधिक प्रतिनिधि शामिल

‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ का आयोजन 10 सितंबर 2026 से नई दिल्ली में हो रहा है। तीन दिन चलने वाले इस सम्मेलन में 25 से ज्यादा देशों के 800 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इनमें वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, विकास सहयोगी, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद, नागरिक समाज संगठन और किसान शामिल हैं। सम्मेलन में मजबूत और सतत शुष्क भूमि कृषि के लिए विज्ञान, तकनीक और नीति आधारित समाधानों पर चर्चा की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य शुष्क भूमि पर खेती करने वाले समुदायों के लिए बेहतर आजीविका के अवसर पैदा करना, फसलों की सहन-क्षमता मजबूत करना, शुष्क भूमि का सतत प्रबंधन करना और पोषण, बाजार एवं नीतियों पर ध्यान देना है।

किसानों की समृद्धि को बनाया जाए सफलता का पैमाना

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शुष्क भूमि कृषि में बदलाव के प्रयासों का केंद्र किसान होने चाहिए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के साथ किसानों की समृद्धि को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उनके अनुसार, शुष्क भूमि सही विज्ञान, सही नीति और सही बाजार सहयोग के साथ भारत, अफ्रीका और समान चुनौतियों वाले अन्य क्षेत्रों के लिए बड़ी ताकत बन सकती है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के पूर्व सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. एस. परोदा ने की। सत्र में आईसीएआर और आईसीआरआईएसएटी से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।

किसानों के अनुभवों को शामिल करने पर जोर

पद्म श्री पुरस्कार विजेता किसान भिकल्या लाडक्या धिंडा ने शुष्क इलाकों में कृषि में बदलाव की रणनीति तैयार करते समय किसानों के अनुभवों और जरूरतों को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया। उद्घाटन सत्र में शिवराज सिंह चौहान ने ‘ट्रांसफॉर्मिंग द ड्राईलैंड्स: द आईसीआरआईएसएटी जर्नी’ का भी विमोचन किया। इसका संपादन डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने किया है तथा इसका प्रकाशन आईसीआरआईएसएटी ने किया है। इसमें एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में विज्ञान, नवाचार, साझेदारियों और प्रभाव के क्षेत्र में आईसीआरआईएसएटी के पांच दशकों से अधिक के कार्य को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा ‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ की सार-पुस्तिका और ‘आईसीआरआईएसएटी रिसर्च एंड कॉर्पोरेट प्रोफाइल’ भी लॉन्च की गईं।

जलवायु सहनशीलता और पोषण पर चर्चा

कांग्रेस के पहले दिन तकनीकी कार्यक्रम में तीन प्रमुख विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इनमें ‘भविष्य के लिए प्रजनन: आनुवंशिक लाभों में तेजी’, ‘जलवायु-प्रतिरोधी शुष्क भूमि परिदृश्य’ और ‘बाजारों एवं नीतियों के माध्यम से बेहतर आहार एवं पोषण’ शामिल रहे। इन सत्रों में फसलों में आनुवंशिक सुधार की गति बढ़ाने, जलवायु के प्रति सहनशीलता मजबूत करने, शुष्क इलाकों के बेहतर प्रबंधन, पोषण बढ़ाने और आजीविका के बेहतर अवसर पैदा करने पर चर्चा हुई।

शुष्क इलाकों में खेती से आगे बढ़कर सोचने की जरूरत

डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने भारत की कृषि प्रणालियों में बदलाव के अनुभव और वैश्विक दक्षिण के लिए उससे मिलने वाले सबक पर बात की। उन्होंने कहा कि शुष्क इलाकों में बदलाव के लिए केवल खेती तक सीमित रहने के बजाय संपूर्ण प्रणाली, संपूर्ण समाज और संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण की जरूरत है। भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, भूमि संसाधन प्रबंधन और सामुदायिक प्रयासों के जरिए शुष्क भूमि की नई संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने शुष्क भूमि क्षेत्रों में भूमि और संसाधन प्रबंधन मजबूत करने तथा समुदायों को सहयोग देने में समग्र दृष्टिकोण की भूमिका पर जोर दिया।

शुष्क क्षेत्रों को उत्पादक और लाभदायक बनाने पर जोर

आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने खाद्य प्रणालियों और आजीविका के लिए शुष्क क्षेत्रों के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शुष्क क्षेत्रों को उत्पादक, लाभदायक और लचीला बनाने के साथ आजीविका के अवसर पैदा करने और पलायन कम करने के लिए रोडमैप की जरूरत बताई। डॉ. आर. एस. परोदा ने शुष्क भूमि की खेती में जल प्रबंधन के महत्व पर जोर देते हुए हर बूंद पानी से अधिक आर्थिक और पोषण संबंधी मूल्य हासिल करने की बात कही। डॉ. पंजाब सिंह ने कहा कि शुष्क भूमि के विकास के अगले चरण में लाभदायक, लचीली, पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और भविष्य की पीढ़ियों के लिए आकर्षक कृषि प्रणालियों पर ध्यान देना चाहिए। डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने शुष्क मिट्टी वाले क्षेत्रों में समाधान को तेजी से अपनाने और उसका विस्तार करने के लिए ज्ञान, विशेषज्ञता और सफल मॉडलों को साझा करने में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

आईसीआरआईएसएटी की बोर्ड अध्यक्ष कैथी रीड ने शुष्क भूमि कृषि पर वैश्विक ध्यान, निवेश और कार्रवाई का आह्वान किया। वहीं, आईसीआरआईएसएटी के पूर्व महानिदेशक डॉ. विलियम डी. डार ने कहा कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग वैश्विक दक्षिण के देशों को समान भागीदार के रूप में एक साथ सीखने, नवाचार करने और समाधान विकसित करने में सक्षम बनाता है। सीजीआईएआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सैंड्रा मीलाच ने कहा कि भारत धीरे-धीरे वैश्विक दक्षिण के लिए समाधान का स्रोत बन रहा है और यहां के नवाचारों को शुष्क क्षेत्रों में समान चुनौतियों का सामना कर रहे स्थानों में अपनाया जा सकता है।

अगले दो दिनों तक जारी रहेगी चर्चा

‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ में अगले दो दिनों तक चर्चा जारी रहेगी। इसमें शुष्क भूमि कृषि में बदलाव के लिए वैज्ञानिक नवाचार, जलवायु सहनशीलता, सतत कृषि प्रणाली, पोषण, बाजार, नीतियों और आजीविका के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture