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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

खरीफ 2026 में सूखे का संकट गहराया, अखिल भारतीय किसान सभा ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की

04 सितंबर 2026, नई दिल्ली: खरीफ 2026 में सूखे का संकट गहराया, अखिल भारतीय किसान सभा ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की – खरीफ 2026 में बारिश की कमी और लंबे शुष्क दौर के बीच अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने केंद्र सरकार से मौजूदा सूखे की स्थिति को गंभीर राष्ट्रीय आपदा के रूप में मान्यता देने और प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की है।

किसान सभा के अनुसार, 28 अगस्त 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 1,071.10 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,090.01 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। इस तरह बुवाई क्षेत्र में 18.91 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। 21 अगस्त को यह कमी 1.50 प्रतिशत थी, जो एक सप्ताह में बढ़कर 1.73 प्रतिशत हो गई।

बारिश की कमी और अल नीनो का असर

AIKS ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने का अनुमान जताया था। अगस्त की शुरुआत तक मौसमी वर्षा दीर्घ अवधि औसत (LPA) से करीब 12 प्रतिशत कम थी। जुलाई में देशभर में बारिश सामान्य के आसपास रही, लेकिन लगभग 47 प्रतिशत जिलों में बारिश कम या बहुत कम रही और कई क्षेत्रों में 21 दिनों से अधिक का शुष्क दौर देखा गया।

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किसान सभा ने कहा कि कमजोर अल नीनो परिस्थितियों के कारण वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में मानसून अनियमित और कमजोर रहा है। इसका सबसे अधिक असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है।

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रागी और कई खरीफ फसलों की बुवाई में गिरावट

ज्ञापन में फसलवार स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। 21 अगस्त तक रागी की बुवाई सामान्य क्षेत्र के करीब 40 प्रतिशत तक रह गई थी, जबकि कपास का क्षेत्र सामान्य का लगभग 86 प्रतिशत था। इसके विपरीत गन्ने का क्षेत्र सामान्य से अधिक, करीब 108 प्रतिशत दर्ज किया गया।

21 अगस्त तक रागी के क्षेत्र में 27.14 प्रतिशत, मक्का में 4.06 प्रतिशत, अरंडी में 20.80 प्रतिशत और सोयाबीन में 1.15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। चावल की बुवाई में भी 3.15 प्रतिशत की कमी थी, जो 28 अगस्त तक बढ़कर 3.35 प्रतिशत हो गई। चावल के क्षेत्र में सबसे अधिक कमी कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में बताई गई है।

राजस्थान, कर्नाटक और महाराष्ट्र में सबसे अधिक क्षेत्र प्रभावित

AIKS के अनुसार कुल खरीफ क्षेत्र में सबसे बड़ी कमी राजस्थान में करीब 11.48 लाख हेक्टेयर, कर्नाटक में 6.19 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 3.11 लाख हेक्टेयर रही। दलहन क्षेत्र में कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान तथा धान क्षेत्र में कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

किसान सभा ने चेतावनी दी है कि खरीफ की कमजोर स्थिति का असर आगामी रबी सीजन पर भी पड़ सकता है। कम बारिश से मिट्टी की नमी, भूजल और किसानों की बचत पर दबाव बढ़ने से रबी की तैयारी प्रभावित होने की आशंका है।

1.2 लाख करोड़ रुपये के विशेष सूखा पैकेज की मांग

AIKS ने केंद्र से 1.2 लाख करोड़ रुपये का विशेष सूखा पैकेज जारी करने की मांग की है। इसमें फसल नुकसान की भरपाई, दोबारा बुवाई के लिए मुफ्त बीज और मनरेगा के विस्तार को शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही गंभीर रूप से प्रभावित प्रत्येक जिले के लिए 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता देने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उपयोग चारा शिविर, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, रोजगार, लघु सिंचाई की आपात मरम्मत और अन्य राहत कार्यों में किया जा सके।

किसान सभा ने प्रभावित राज्यों में तत्काल केंद्रीय दल भेजकर खेतों और जमीनी परिस्थितियों का आकलन कराने तथा सूखे का निर्धारण गांव और राजस्व सर्किल स्तर पर करने की मांग भी की है।

किसानों के कर्ज और फसल बीमा पर भी जोर

ज्ञापन में किसानों और ग्रामीण मजदूरों के कर्ज में राहत की मांग करते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, माइक्रोफाइनेंस और निजी कर्ज पर राहत तथा प्रभावित जिलों में कर्ज वसूली पर 12 महीने की रोक लगाने की मांग की गई है।

फसल बीमा योजना में व्यापक बदलाव की मांग करते हुए AIKS ने सभी किसानों और बटाईदारों को स्वचालित रूप से शामिल करने, किसान का प्रीमियम न्यूनतम रखने और दावों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करने की मांग की है।

मनरेगा में 200 दिन रोजगार और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की मांग

किसान सभा ने सूखा प्रभावित ग्रामीण परिवारों के लिए मनरेगा के तहत साल में 200 दिन रोजगार की गारंटी देने और केंद्र द्वारा 90 प्रतिशत खर्च वहन करने की मांग की है। साथ ही प्रभावित जिलों में खरीफ खाद्यान्न, दलहन और तिलहन की 100 प्रतिशत खरीद C2+50 प्रतिशत के आधार पर करने तथा बफर स्टॉक को राहत कार्यों के लिए उपयोग में लाने की मांग की गई है।

AIKS ने सूखा प्रभावित गांवों में पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा शुल्क में राहत सहित कई सामाजिक सुरक्षा उपाय लागू करने की भी मांग की है। संगठन ने केंद्र से राज्यों को अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने और आपदा राहत व्यवस्था में राज्यों की भूमिका को मजबूत करने की मांग की है।

किसान सभा ने कहा कि यदि सरकार ने सूखे और ग्रामीण संकट के समाधान के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो देशभर में किसानों और ग्रामीण मजदूरों के आंदोलन तेज हो सकते हैं।

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