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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

डिजिटल फसल सर्वे: किसानों के लिए वरदान या नई चुनौती?

26 मार्च 2025, नई दिल्ली: डिजिटल फसल सर्वे: किसानों के लिए वरदान या नई चुनौती? – कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने खेती को डिजिटल बनाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है। मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) नाम की प्रणाली शुरू की गई है, जिसके जरिए मोबाइल इंटरफेस से बोई गई फसलों का डेटा सीधे खेतों से जुटाया जाएगा। मंत्रालय का दावा है कि इससे फसल क्षेत्र की सटीक और रियल-टाइम जानकारी मिल सकेगी, जो उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद करेगी।

एग्री स्टैक: डेटा सुरक्षा पर जोर

इसके साथ ही, मंत्रालय ने एग्री स्टैक नामक एक डिजिटल ढांचा तैयार किया है, जो डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और देश के आईटी कानूनों के तहत काम करता है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि किसानों का डेटा उनकी सहमति से ही लिया जाएगा और उनकी जानकारी पर उनका पूरा नियंत्रण रहेगा। डेटा को एक गुप्त कोड में भेजा जाएगा, जिसे केवल अधिकृत सिस्टम ही पढ़ सकेंगे। सुरक्षित एपीआई और टोकन-आधारित प्रमाणीकरण से डेटा एक्सचेंज को नियंत्रित किया जाएगा।

हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि क्या ग्रामीण इलाकों में तकनीकी पहुंच और जागरूकता इस सिस्टम को पूरी तरह लागू करने के लिए पर्याप्त है। मंत्रालय ने बताया कि साइबर सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और CERT-In के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है, साथ ही आईटी सिस्टम का नियमित सुरक्षा ऑडिट भी होगा।

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मोबाइल नहीं तो क्या?

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के बावजूद, जिन किसानों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, उनके लिए सरकार ने वैकल्पिक रास्ते सुझाए हैं। ऐसे किसान FPO (किसान उत्पादक संगठन), कृषि सखियों या कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSC) के जरिए एग्री स्टैक से जुड़ सकते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकारें शिविर लगाकर किसानों को जोड़ने का काम कर रही हैं। मंत्रालय का कहना है कि सभी राज्यों को तकनीकी और प्रशासनिक सहायता दी जा रही है।

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डिजिटल कृषि मिशन के तहत बनी किसान रजिस्ट्री में महिला किसानों सहित सभी भूमि धारक किसानों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि किरायेदार और पट्टेदार किसानों को भी इसमें जगह देने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, यह फैसला राज्य सरकारों की नीतियों पर निर्भर करेगा।

यह जानकारी लोकसभा में कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने एक लिखित जवाब में दी। उन्होंने कहा, “एग्री स्टैक को संघीय ढांचे में बनाया गया है, ताकि डेटा पर राज्यों का नियंत्रण रहे।”

हालांकि, इस योजना के असल प्रभाव को समझने के लिए इसके जमीनी स्तर पर लागू होने का इंतजार करना होगा। क्या यह तकनीक वाकई किसानों की जिंदगी आसान बनाएगी, या सिर्फ कागजी आंकड़ों तक सीमित रह जाएगी, यह समय बताएगा।

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