अल नीनो के खतरे के बीच भारत के 111 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों पर केंद्र का विशेष फोकस
27 जून 2026, नई दिल्ली: अल नीनो के खतरे के बीच भारत के 111 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों पर केंद्र का विशेष फोकस – संभावित अल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 की तैयारियों को तेज कर दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), आईसीएआर-क्रिडा (ICAR-CRIDA) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की।
कृषि मंत्रालय और आईसीएआर द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिले चिन्हित किया गया है। इनमें 111 जिले ऐसे हैं, जहां सिंचाई का दायरा 25 प्रतिशत से भी कम है, इसलिए इन्हें सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा 76 जिलों को मध्यम और 128 जिलों को कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित 12 राज्यों में स्थित हैं।
सरकार ने इन जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजनाओं (District Agriculture Contingency Plans) को लागू करने के निर्देश दिए हैं। इन योजनाओं में स्थानीय जलवायु, फसल प्रणाली और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक फसलें, फसल विविधीकरण, जल प्रबंधन और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के विकल्प शामिल किए गए हैं।
कमजोर मानसून की स्थिति में जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। केंद्र ने राज्यों को तालाबों, खेत-तालाबों, चेक डैम, स्टॉप डैम और अन्य जल संरचनाओं की मरम्मत तथा वर्षा जल संचयन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मनरेगा सहित ग्रामीण विकास योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण और रोजगार सृजन को साथ-साथ बढ़ावा दिया जाएगा।
फसल रणनीति में भी बदलाव पर जोर दिया गया है। राज्यों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली किस्मों को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण, अंतरवर्तीय खेती तथा मिश्रित खेती अपनाने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से दलहन, श्री अन्न (मोटे अनाज) और तिलहनी फसलोंको प्राथमिकता देने की बात कही गई है, क्योंकि ये सीमित नमी की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं। किसानों को पर्याप्त वर्षा और मिट्टी में नमी आने से पहले बुवाई नहीं करने की सलाह दी गई है।
सरकार ने खरीफ सीजन के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है। संभावित प्रभावित जिलों में पुनर्बुवाई की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त बीज भंडार भी सुरक्षित रखा गया है। उर्वरकों जैसे यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी की उपलब्धता भी पर्याप्त बताई गई है।
किसानों तक समय पर वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने के लिए देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK), कृषि-मौसम सलाह इकाइयों, एसएमएस, व्हाट्सएप, रेडियो, टेलीविजन और सोशल मीडिया का उपयोग किया जाएगा। साथ ही पशुपालकों के लिए चारे की संभावित कमी से निपटने हेतु अग्रिम भंडारण और आपूर्ति की भी तैयारी की गई है।
किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का दायरा बढ़ाने, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जारी करने में तेजी लाने और पीएम-किसान की राशि का उपयोग कृषि निवेश में करने पर भी जोर दिया गया है। मानसून और फसलों की स्थिति की लगातार निगरानी के लिए केंद्र सरकार ने ‘एल नीनो मॉनिटरिंग सेल’ और ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ का गठन किया है।
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसी संकट का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि पहले से वैज्ञानिक और व्यावहारिक रणनीति के साथ तैयारी कर रही है। उन्होंने किसानों से घबराने के बजाय वैज्ञानिक सलाह का पालन करने और केंद्र व राज्य सरकारों के साथ मिलकर परिस्थितियों का सामना करने की अपील की।
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