कम बारिश और संभावित एल-नीनो प्रभाव से केंद्र सतर्क, खरीफ फसलों की स्थिति पर सरकार की पैनी नजर
24 जुलाई 2026, नई दिल्ली: कम बारिश और संभावित एल-नीनो प्रभाव से केंद्र सतर्क, खरीफ फसलों की स्थिति पर सरकार की पैनी नजर – देश में खरीफ फसलों की बुवाई के बीच कम बारिश और संभावित अल-नीनो प्रभाव की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर खरीफ फसलों की बुवाई, मानसून की स्थिति, वर्षा की कमी वाले जिलों तथा उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कम वर्षा वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए और राज्यों के साथ लगातार समन्वय बनाकर किसानों तक समय पर आवश्यक सहायता पहुंचाई जाए। सरकार ने स्पष्ट किया कि मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों के हितों से जुड़े सभी आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएं।
देश में सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 9 जुलाई 2026 को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के अंतिम हिस्सों को कवर करते हुए पूरे देश में अपना विस्तार पूरा कर लिया था। मानसून का देशभर में विस्तार सामान्य तिथि 8 जुलाई से केवल एक दिन बाद पूरा हुआ।
हालांकि मानसून के विस्तार की गति सामान्य रही, लेकिन बारिश के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। इस वर्ष देश में अब तक सामान्य से लगभग 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। इसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती वृद्धि पर पड़ सकता है।
कम बारिश वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से सोयाबीन, धान, कपास, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। वर्षा में कमी के कारण किसानों के सामने दोबारा बुवाई, सिंचाई और फसल चयन जैसी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्यों के साथ समन्वय पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यों के कृषि विभागों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा जाए। जिन जिलों में वर्षा की कमी है, वहां फसलवार स्थिति का आकलन कर किसानों को आवश्यक सलाह उपलब्ध कराई जाए। साथ ही बीज, उर्वरक और अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि मौसम की अनिश्चितता का सबसे कम प्रभाव किसानों पर पड़े। यदि वर्षा की स्थिति आगे भी कमजोर रहती है तो वैकल्पिक फसलों, कम अवधि वाली किस्मों और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अल-नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियां मानसून के व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह, समय पर सरकारी सहायता और स्थानीय स्तर पर फसल प्रबंधन की रणनीति बेहद महत्वपूर्ण होगी। खरीफ सीजन में आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
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