राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

लौह अयस्क के अवशेषों से खेती को फायदा? ICAR-IARI और एएम/एनएस इंडिया मिलकर करेंगे शोध  

04 सितंबर 2026, नई दिल्ली: लौह अयस्क के अवशेषों से खेती को फायदा? ICAR-IARI और एएम/एनएस इंडिया मिलकर करेंगे शोध – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), नई दिल्ली और आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया)  ने कृषि में लौह अयस्क के अवशेष (Iron Ore Tailings-IOTs) के टिकाऊ इस्तेमाल पर वैज्ञानिक शोध के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसका उद्देश्य लौह अयस्क के प्रसंस्करण से निकलने वाले अवशेषों को कृषि में उपयोग करने की संभावनाओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करना है।

MoU पर ICAR-IARI के संयुक्त निदेशक (अनुसंधान) डॉ. सी. विश्वनाथन और AM/NS India के प्रमुख-रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. विश्वनाथन एन. ने हस्ताक्षर कर इसका आदान-प्रदान किया। इस दौरान ICAR-IARI के प्रधान वैज्ञानिक और प्रधान अन्वेषक डॉ. भूपिंदर सिंह सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

2024 में शुरू हुआ था प्रारंभिक अध्ययन

दोनों संस्थानों के बीच यह सहयोग वर्ष 2024 में शुरू किए गए प्रारंभिक अध्ययनों पर आधारित है। इन अध्ययनों में लौह अयस्क के प्रसंस्करण के दौरान निकलने वाले अवशेषों को कृषि में इस्तेमाल करने की संभावनाओं का आकलन किया गया था। अध्ययन में पाया गया कि लौह अयस्क के अवशेषों में सिलिका, आयरन ऑक्साइड, एल्युमिना, कैल्शियम और मैग्नीशियम सहित कई खनिज तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। हालांकि, कृषि में इनके इस्तेमाल से पहले वैज्ञानिक जांच और सुरक्षा मूल्यांकन किया जाना जरूरी है।

धान, गेहूं और सब्जियों पर मिले उत्साहजनक परिणाम

ICAR-IARI, नई दिल्ली और छत्तीसगढ़ के किरंदुल स्थित AM/NS India की बेनिफिशिएशन सुविधा के पास किए गए शुरुआती प्रयोगशाला और फील्ड अध्ययनों में उत्साहजनक परिणाम सामने आए। इनमें उचित तरीके से जांचे गए लौह अयस्क अवशेषों को धान, गेहूं और सब्जियों जैसी फसलों के लिए खनिज पोषक तत्वों के संभावित स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना देखी गई।

कई मौसमों तक चलेगा शोध

MoU के तहत दोनों संस्थान ICAR-IARI, नई दिल्ली और AM/NS India की किरंदुल स्थित सुविधाओं में कई मौसमों तक दीर्घकालिक अध्ययन करेंगे। इसमें फसलों की प्रतिक्रिया, पोषक तत्वों की उपलब्धता, पौधों पर विषाक्त प्रभाव, पोषक तत्वों की गतिशीलता, रिसाव और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। शोध के जरिए लौह अयस्क के अवशेषों के कृषि उपयोग को लेकर ठोस वैज्ञानिक जानकारी जुटाई जाएगी। साथ ही इनके सुरक्षित, उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल इस्तेमाल के तरीके विकसित करने की कोशिश की जाएगी।

लौह की कमी वाली मिट्टी में उपयोग की संभावना

कार्यक्रम के तहत यह भी अध्ययन किया जाएगा कि आयरन से भरपूर इन अवशेषों का लौह की कमी वाली और पोषक तत्वों से कमजोर मिट्टी में कितना उपयोग हो सकता है। इसके साथ ही कृषि उपज में लौह की मात्रा बढ़ाने की संभावना भी देखी जाएगी। इससे फसल जैव-सुदृढ़ीकरण के प्रयासों को सहयोग मिल सकता है।

इस पहल का उद्देश्य खनन से निकलने वाले ऐसे उप-उत्पाद का बेहतर इस्तेमाल करना है, जिसे लंबे समय तक भंडारित करना पड़ता है। इससे कचरे के संचय को कम करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की संभावना है। AM/NS India की ओर से संसाधनों के बेहतर उपयोग, अपशिष्ट के पुन: उपयोग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए स्टील स्क्रैप रिसाइक्लिंग, स्टील स्लैग से ‘आकार’ उत्पाद तैयार करने, पानी के पुनर्चक्रण और 90 प्रतिशत से अधिक प्रोसेस बाय-प्रोडक्ट के पुन: उपयोग या रिसाइक्लिंग जैसी पहल भी की जा रही हैं।

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