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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में जुटे 22 राज्यों के कृषि मंत्री, अपने खेतों में प्राकृतिक खेती का लिया संकल्प, संतुलित खाद उपयोग पर जोर

31 मई 2026, नई दिल्ली: राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में जुटे 22 राज्यों के कृषि मंत्री, अपने खेतों में प्राकृतिक खेती का लिया संकल्प, संतुलित खाद उपयोग पर जोर – राजधानी दिल्ली स्थित पूसा परिसर में 28 और 29 मई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस में देश के इतिहास में पहली बार 22 राज्यों के कृषि मंत्री एक मंच पर जुटे। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करने, दलहन-तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और ‘खेत बचाओ अभियान’ को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने पर व्यापक सहमति बनी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन मंथन किया गया। सम्मेलन के पहले दिन राज्यों के कृषि एवं बागवानी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों, बीज, उर्वरक, जल प्रबंधन और फसल नियोजन पर चर्चा की। वहीं दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों ने नीतिगत स्तर पर साझा रणनीति तैयार की।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प

सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक यह रही कि विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों ने केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात ही नहीं की, बल्कि अपने निजी खेतों में भी इसका प्रयोग करने का संकल्प लिया। माना जा रहा है कि इससे किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को लेकर विश्वास बढ़ेगा और उन्हें व्यवहारिक उदाहरण भी मिलेंगे।

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि नीति निर्माता और जनप्रतिनिधि स्वयं प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो इसका सकारात्मक संदेश किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

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‘खेत बचाओ’ अभियान पर विशेष जोर

सम्मेलन से उभरकर आया प्रमुख संदेश था—‘खेत बचाओ, भविष्य बचाओ’। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खेत बचाने का अर्थ केवल कृषि भूमि की रक्षा करना नहीं, बल्कि मिट्टी, पर्यावरण, जल संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करना भी है।

इसी उद्देश्य से सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ को केंद्र और राज्य सरकारों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से राष्ट्रीय अभियान के रूप में चलाने पर बल दिया गया।

संतुलित उर्वरक उपयोग पर बनी सहमति

सम्मेलन में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि रासायनिक खादों के पूर्ण निषेध की बात नहीं है, बल्कि आवश्यकता के अनुसार संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।

इसके लिए किसानों के बीच व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा विभिन्न संस्थाओं के समन्वय से निगरानी एवं मॉनिटरिंग तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता और खरीफ रणनीति पर मंथन

दो दिवसीय सम्मेलन में खरीफ फसलों की तैयारियों के साथ-साथ दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। कृषि मंत्रियों ने उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत सुधारने, लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।

सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि खरीफ सीजन की रणनीति को केवल मौसमी तैयारी तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे कृषि क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से जोड़ा जाएगा।

कृषि को राष्ट्रीय मिशन बनाने पर जोर

सम्मेलन के समापन अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार कृषि को केवल उत्पादन का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण, पोषण, किसान आय और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़े राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देख रही है।

उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े पद नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है। सम्मेलन में शामिल सभी मंत्रियों और अधिकारियों ने कृषि क्षेत्र में तय लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का सामूहिक संकल्प लिया।

राष्ट्रीय खरीफ कॉन्फ्रेंस के समापन के साथ यह संदेश दिया गया कि प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, दलहन-तिलहन आत्मनिर्भरता और ‘खेत बचाओ अभियान’ जैसे विषयों को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें जमीनी स्तर पर लागू कर कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

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