राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसानों का सारथी : कितना उपयोगी ?

लेखक: मधुकर पावर

25 जुलाई 2026, नई दिल्ली: किसानों का सारथी : कितना उपयोगी ? – भारत में खेती में मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत, कीट-रोगों का प्रकोप, बाजार में मूल्य अस्थिरता और सरकारी योजनाओं की जटिलताओं के बीच यदि किसान को समय पर वैज्ञानिक एवं विश्वसनीय मार्गदर्शन मिल जाए तो उसकी आय और उत्पादकता दोनों बढ़ सकती हैं। इसी सोच के साथ जुलाई 2021 में किसान सारथी की शुरुआत की गई। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में विकसित यह देश का सबसे बड़ा एकीकृत डिजिटल कृषि-परामर्श मंच है, जिसका संचालन भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान तथा डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन द्वारा किया जा रहा है।

कागज़ पर देखें तो यह मंच अत्यंत प्रभावशाली दिखाई देता है। किसान सारथी इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (आईआईडीएस) के माध्यम से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद स्थापित करता है। यह 730 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), 100 से अधिक भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के संस्थानों तथा 65 से अधिक कृषि विश्वविद्यालयों को एक मंच पर जोड़ता है। किसान कॉल सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, भारत मौसम विज्ञान विभाग, माईस्कीम तथा भाषिणी जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्मों का एकीकरण इसकी विशेषता है। किसानों को वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, व्हाट्सएप, कॉल सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर जैसे अनेक माध्यमों से जोड़ने का प्रयास किया गया है ताकि डिजिटल संसाधनों की असमान उपलब्धता के बावजूद कोई किसान परामर्श से वंचित न रहे। किसान सारथी किसानों को मौसम की जानकारी, मंडी भाव, फसल, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, सरकारी योजनाओं और कृषि विशेषज्ञों से परामर्श जैसी अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराता है। 25 जून 2026 तक इस पर 610 सरकारी योजनाएँ, जिनमें 102 केंद्र सरकार की योजनाएँ शामिल हैं, उपलब्ध हैं।

किसान 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से संवाद कर सकते हैं, प्रशिक्षण एवं वीडियो परामर्श में भाग ले सकते हैं और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत सलाह प्राप्त कर सकते हैं। किसान सारथी इंटरैक्टिव इन्फॉर्मेशन डिसेमिनेशन सिस्टम (आईआईडीएस) की तकनीक के कारण विशेषज्ञ किसान का पिछला रिकॉर्ड देखकर अधिक सटीक सलाह दे सकते हैं। “नो योर फार्मर” (केवाईएफ) दृष्टिकोण इस प्रणाली को और प्रभावी बनाता है। पिछले महीने 25 जून 2026 तक किसान सारथी 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों और 6.63 लाख गाँवों तक पहुँच चुका है। इसके नेटवर्क में 4,767 भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक तथा 113 आईसीएआर संस्थान जुड़े हैं। लगभग 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला किसान शामिल हैं। किसान सारथी से अब तक 19.21 लाख प्रश्नों का समाधान किया गया है तथा 21,900 कृषि परामर्श जारी किए गए हैं । लेकिन बात इस पर भी ध्यान देना होगा । देश में किसानों की संख्या 12 करोड़ से अधिक है और किसान सारथी से अभी तक लगभग 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हुए हैं । इनमें से लगभग 2.89 करोड़ किसानों का पंजीकरण नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से हुआ है, जबकि मोबाइल ऐप से केवल 21,517, वेब पोर्टल से मात्र 2,416, कॉमन सर्विस सेंटर से 39,193 और किसान कॉल सेंटर से 5.35 लाख किसान जुड़े। यह आँकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि डिजिटल मंच होने के बावजूद किसान स्वयं इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। यह इस्से भी सिद्ध होता है कि पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के केवल 19.21 लाख प्रश्नों का समाधान और 21,900 परामर्श जारी होना अपेक्षाकृत काफी कम है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में किसान केवल पंजीकृत होकर रह गए हैं, नियमित उपयोगकर्ता नहीं बन पाए हैं। डिजिटल मंच की वास्तविक सफलता केवल पंजीकरण से नहीं, बल्कि उसके सक्रिय उपयोग और किसानों की संतुष्टि से मापी जानी चाहिए। यह स्थिति ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को भी उजागर करती है।

आज भी अनेक किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, इंटरनेट की गुणवत्ता कमजोर है और डिजिटल साक्षरता सीमित है। कई वरिष्ठ किसान मोबाइल ऐप चलाने में सहज नहीं हैं। भाषाई विकल्प उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय बोलियों और व्यवहारिक उपयोग में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। एक और चुनौती कृषि परामर्श की विश्वसनीयता और समयबद्धता की है। मौसम, कीट प्रकोप और बाजार भाव जैसी जानकारियाँ मिनटों और घंटों में बदल जाती हैं। यदि परामर्श समय पर नहीं पहुँचे तो उसका महत्व कम हो जाता है। इसलिए केवल तकनीक विकसित करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी सतत निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया भी आवश्यक है। किसान सारथी को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ ठोस कदम आवश्यक हैं। सबसे पहले, प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर डिजिटल कृषि स्वयंसेवक अथवा “किसान मित्र” तैयार किए जाएँ, जो किसानों को ऐप और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग सिखाएँ। कृषि विज्ञान केंद्रों और कॉमन सर्विस सेंटरों में नियमित डिजिटल प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएँ। ऐप को और सरल, ऑफलाइन-अनुकूल तथा स्थानीय बोलियों के अनुरूप बनाया जाए। मौसम विभाग, ई-नाम, उपग्रह आधारित फसल निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित रोग पहचान जैसी सुविधाओं का व्यापक एकीकरण किया जाए। साथ ही, किसानों के लिए यह जानना भी आसान होना चाहिए कि उनके द्वारा पूछे गए प्रश्न का समाधान कितने समय में मिलेगा। शिकायत निवारण और फीडबैक प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। हर जिले में यह सार्वजनिक रूप से बताया जाए कि कितने किसानों ने सेवा का उपयोग किया, कितने प्रश्नों का समाधान हुआ और किसानों की संतुष्टि का स्तर क्या है। डिजिटल मंच की सफलता सर्वर पर दर्ज पंजीकरणों से नहीं, बल्कि किसानों को समय पर उन्हें प्रामाणिक जानकारी मिलनी चाहिए। जिस दिन किसान बिना किसी मध्यस्थ के अपने मोबाइल से सहजता से सलाह ले सकेगा, समय पर समाधान प्राप्त करेगा और उसकी आय में वास्तविक वृद्धि दिखाई देगी, उसी दिन किसान सारथी अपने उद्देश्य की पूर्ण सार्थकता सिद्ध कर पाएगा।

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