प्राकृतिक खेती से जुड़े 24 लाख किसान, 2030 तक 85 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य; शिवराज ने प्रगति की समीक्षा की
02 सितंबर 2026, नई दिल्ली: प्राकृतिक खेती से जुड़े 24 लाख किसान, 2030 तक 85 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य; शिवराज ने प्रगति की समीक्षा की – देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन (NMNF) की प्रगति की समीक्षा की।
बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के पंजीकरण एवं प्रमाणन, मृदा स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, अनुसंधान, बाजार संपर्क और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि देशभर में अब तक 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। वहीं, राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्राकृतिक खेती के विस्तार को और गति देने पर जोर दिया गया।
प्राकृतिक खेती से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
समीक्षा बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती को केवल कृषि की एक पद्धति तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को टिकाऊ बनाने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती से किसानों को होने वाले वास्तविक आर्थिक लाभों का व्यापक और वैज्ञानिक आकलन करने के निर्देश दिए। इसके तहत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की उत्पादकता, उत्पादन लागत, बाजार मूल्य और शुद्ध आय की तुलनात्मक स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के अनुभव, वैज्ञानिक अध्ययन और जमीनी आंकड़ों को एकत्र कर उनका विश्लेषण किया जाए, ताकि प्राकृतिक खेती के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों का ठोस दस्तावेज तैयार किया जा सके।
प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग का उठाएं फायदा
कृषि मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में प्राकृतिक और रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय किसानों के लिए इस बाजार का लाभ उठाने का बड़ा अवसर है। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन और बाजार संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में प्राकृतिक उत्पादों के विपणन, निर्यात की संभावनाओं और अलग-अलग राज्यों में विकसित सफल बाजार मॉडलों पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए मजबूत वैल्यू चेन विकसित करने की जरूरत बताई गई, ताकि किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके।
मृदा स्वास्थ्य के आंकड़ों पर विशेष ध्यान
बैठक में मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस दौरान राज्यों में मृदा नमूने एकत्र करने, उनकी जांच और मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार करने की स्थिति की जानकारी दी गई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती के प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए किसानों के खेतों की मृदा स्थिति से जुड़े आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन जरूरी है। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की मिट्टी का नियमित आकलन करने और इन आंकड़ों का इस्तेमाल भविष्य की योजनाओं में करने के निर्देश दिए।
80 हजार से ज्यादा किसानों का प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण
बैठक में PGS-India Natural Certification System के तहत किसानों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि अब तक 80,034 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अलावा 100 प्राकृतिक खेती आधारित FPOs और 162 जैविक खेती आधारित FPOs समेत कुल 262 FPOs प्रमाणन व्यवस्था से जुड़े हैं। बैठक में प्रमाणन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने, किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने और FPOs के माध्यम से प्राकृतिक खेती उत्पादों की बिक्री को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
नमामि गंगे क्षेत्र में 97 हजार से ज्यादा किसान जुड़े
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक खेती की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 45 जिलों में 777 क्लस्टरों के माध्यम से 97,125 किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है। इसके साथ ही 38,850 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया गया है। बैठक में इन क्षेत्रों में किसानों के प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती के विस्तार और सफल मॉडलों को दूसरे किसानों तक पहुंचाने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
मॉडल फार्म और फील्ड विजिट को बढ़ावा
शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती के सफल मॉडलों को किसानों तक पहुंचाने के लिए मॉडल फार्म और फील्ड विजिट का प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों के नियमित अध्ययन भ्रमण कराए जाएं, ताकि वे प्राकृतिक खेती के सफल प्रयोगों को खुद देखकर समझ सकें। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के मॉडल फार्मों को ज्ञान एवं प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया।
कृषि शिक्षा में प्राकृतिक खेती पर जोर
बैठक में कृषि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। चौहान ने कहा कि कृषि विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में वे किसानों को बेहतर तकनीकी मार्गदर्शन दे सकें। इसके लिए कृषि शिक्षा संस्थानों में प्राकृतिक खेती आधारित प्रशिक्षण, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन और व्यवहारिक शिक्षण गतिविधियों को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना समय पर पूरी करने के निर्देश
प्राकृतिक खेती के लिए प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को इसकी स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के जरिए प्राकृतिक खेती में अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की योजना है।
बैठक में प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने, मृदा स्वास्थ्य सुधार, प्रमाणन, प्रशिक्षण, अनुसंधान और बाजार संपर्क से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के साथ टिकाऊ कृषि प्रणाली को मजबूत किया जा सके। समीक्षा बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्र, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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