अब करें टमाटर की उन्नत खेती

Share this

अब करें टमाटर की उन्नत खेती

अब करें टमाटर की उन्नत खेती – भूमि : टमाटर की खेती के लिए उपयुक्त उचित जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट अच्छी मानी जाती है। 

उचित किस्म : स्वर्ण, लालिमा, पूसा।

बीज दर : हाईब्रिड 200 ग्राम, देशी 300 ग्राम।

लगाने की दूरी : टमाटर के बीज को लगाने से पहले छोटी-छोटी क्यारियां जिसका आकार 1 मीटर चौड़ा और लम्बाई अपने हिसाब से रखते हैं फिर उसमें बीज कतार से कतार डालते हैं। यह 4-5 सप्ताह में तैयार हो जाता है। 

लगाने का समय :  खरीफ – अगस्त, सितम्बर,  शीत-नवम्बर-जनवरी,  ग्रीष्म – अपै्रल-15 जून। 

लगाने की दूरी : पौधा- पौधा – 45-60 सेमी  कतार से कतार – 60-90 सेमी।

गोबर की खाद : खेत की तैयारी के समय पूरी मात्रा दें तथा यूरिया गुड़ाई करते समय 2-3 बार मेें दें।

सिंचाई : वर्षाऋतु में रोपी गई टमाटर की फसल में पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती है, और यह सतर्क सिंचाई वाली फसल है, अर्थात् उचित समय में सिचांई बहुत जरूरी है, इसमे कम या अधिक सिंचाई दोनो से हानि होती है गर्मी में 7-10 दिन के अन्तर में सिंचाई एवं ठंडी में 10-15 दिन के अंतर में सिंचाई करें। 

अंत: क्रियायें : टमाटर जल्दी जल्दी एवं उथली निराई-गुड़ाई वाली फसल है। टमाटर की प्रत्येक सिंचाई के बाद हेंड हो से जमीन को भुरभुरी कर दें या 30-40 दिन बाद फावड़ा के सहायता से मिट्टी चढ़ा दें जब फसल दो महीने की हो जाये तो पौधे के पास लकड़ी लगाकर बांध दें, जिसे हम सहारा देना कहते हंै ऐसा करने से पौधा अधिक बढ़ता है।

टमाटर एक महत्वपूर्ण संरक्षित खाद्य है, इसे सभी सब्जियों में डालकर पकाया जाता है, इसके बिना सब्जी अधूरी सी लगती है तथा इसकी खेती संसार के सभी भागों में की जाती है। टमाटर का प्रयोग प्रमुख रूप से सलाद, आचार, टमाटर कैचप, चटनी बनााने में किया जाता है। संसार में आलू और शकरकंद के बाद टमाटर ही सबसे अधिक पैदा की जाने वाली सब्जी है।

उपज : हाइब्रिड – 100-150 क्वि./ एकड़ 

देशी- 70 – 80 क्वि./एकड़  

कीट:

फल छेदक कीट –  टमाटर फसल में कीट की लटें फलों में छेद करके अंदर से खाती है। कभी-कभी इनके प्रकोप सें फल सड़ जाते हैं और उत्पादन में कमी के साथ साथ फलों की गुणवत्ता भी कम हो जाती है। 

नियंत्रण – मैलाथियान 50 ईसी एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। 

सफेद मक्खी, थ्रिप्स, हरा तेला व मोयला – ये कीट पौधों की पत्तियों व कोमल शाखाओं से रस चूस कर कमजोर देते हैं सफेद मक्खी टमाटर में विषाणु रोग फैलाती है इनके प्रकोप से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। 

नियंत्रण – फास्फोमिडान 85 एसएल 0.3 मिलीलीटर या डाइमिथिएट 30 ईसी या एक मीलीलीटर का प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें आवश्यकता पडऩे पर यह छिड़काव 15-20 दिन बाद दोहरायें।

लीफ माइनर –   ये कीट बहुत ही छोटे होते है जो पत्तियों के ऊपरी सतह में टेढ़ी-मेढ़ी सुरंग बनाकर उनको खाते हैं। 

रोकथाम – मैलाथियान 50 ईसी एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। 

सफेद लट – यह टमाटर फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है। इसका आक्रमण जड़ों पर होता है। इसके प्रकोप से पौधे मर जाते हैं।

नियंत्रण – फोरेट 10 जी या कार्बोफ्यूरान 3 जी 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई से पूर्व कतारों में पौधों की जड़ों के पास डालें। 

कटवा लट – इस कीट की लटे रात में भूमि से बहार निकल कर छोटे-छोटे पौधों के सतह के बराबर से काटकर गिरा देती है।  

नियंत्रण – क्विनालफास 1.5 प्रतिशत चूर्ण 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मिलायें।

रोग:  

पौध सडऩ –  यह रोग नर्सरी में पौधे आधार पर आक्रमण करता है और पौधा गिर कर मर जाता है। 

रोकथाम – बीज उपचार बाविस्टीन से 2-3 ग्राम /कि.ग्रा के हिसाब से करके नर्सरी में डालें।

फल विगलन – इस रोग के कारण फलों पर प्रारम्भ में काले धब्बे बनते हंै जो फैलकर फल को सड़ा देते हैं।

रोकथाम – डी एम 45 या बाविस्टीन या केप्टान 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

उकठा रोग – इस रोग के कारण पत्तियां पिली होकर मर जाती हंै और प्रभावित पौधा सूख कर मर जाता है। 

रोकथाम –

1. बीज उपचार करें।

2. रोग ग्रसित पौधे के उखाड़कर जला दें। 

खरपतवार – मुख्य रूप से टमाटर की खेती में पुलघास, लहसुवा, मकड़ा, बड़ी दूधी आदि आती हैं। 

नियंत्रण –  खुरपी की सहायता से उखाड़ दें। हाथ से निंदाई करें। रसायनिक विधि से 2-4 डी. डेलापन 2 मी.ली./पानी में घोल बनाकर छिड़कें।

  • प्रीति गावड़े इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर
  • preeti.gawde89@gmail.com
Share this
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

10 − 9 =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।