मसूर उत्पादन के कीर्तिमान ने बढ़ाया मान

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7 जनवारी 2021, इंदौर। मसूर उत्पादन के कीर्तिमान ने बढ़ाया मानपरम्परागत खेती के बजाय यदि कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उन्नत तरीके से खेती की जाए, तो फसल उत्पादन का कीर्तिमान रचा जा सकता है। नरसिंहपुर जिले के प्रगतिशील किसान श्री राव गुलाबसिंह लोधी ने जिले में मसूर का लगातार सर्वाधिक उत्पादन लेकर इसे साबित कर दिया है। ग्राम नन्हेगांव तहसील गोटेगांव जिला नरसिंहपुर के श्री राव गुलाबसिंह लोधी ने कृषक जगत को बताया कि पहले वे परम्परागत खेती करते थे, लेकिन बाद में नरसिंहपुर के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर मसूर की उन्नत तरीके से उचित फसल प्रबंधन के साथ खेती की, तो लागत मूल्य में कमी आई और मसूर का उत्पादन तो बढ़ा ही सम्मान भी मिला। श्री लोधी ने बताया कि कल्टीवेटर से आड़ी -खड़ी जुताई कर मसूर किस्म जे. एल.-3 बीजोपचार के बाद सिफारिशी रसायनिक जैविक खाद डालकर 9 इंच पर बोनी की और 50 फीट की दूरी पर एक कतार में पूर्व से पश्चिम दिशा में सरसों किस्म पूसा बोल्ड लगाई। इस तरह मसूर में सरसों लगाने से जनवरी माह में जो उत्तरी ठंडी हवाएं आती हैं, वह सरसों होने से नीचे बढऩे वाली मसूर में पाले से नुकसान नहीं होता। मसूर में सरसों की कतार लगाने से इस पर बैठी चिडिय़ां मसूर के कीटों को खा जाती है इससे प्राकृतिक जैविक कीट नियंत्रण होने से लागत में कमी आ जाती है। सरसों में पुष्पन के समय ज़्यादा मधुमक्खियां आती हैं इस कारण सह फसल मसूर में भी परागण होने से अच्छा उत्पादन मिलता है। श्री लोधी ने 2016-17 में सरसों 2 क्विंटल /एकड़ से अधिक उत्पादित की। मसूर का 13.60 क्विंटल/एकड़ का उत्पादन लिया, जो एक कीर्तिमान है। वर्ष 2017-18 में 12.25 और 2018-19 में 12 क्विंटल/एकड़ मसूर का उत्पादन लिया। वे जिले में लगातार मसूर का सर्वाधिक उत्पादन ले रहे हैं। श्री लोधी ने खरीफ की तरह रबी में भी रिज फरो पद्धति से मसूर और सरसों की खेती चालू की है। उल्लेखनीय है कि कृषि में नवीन प्रौद्योगिकियों को अपनाकर उच्च उत्पादन और आय प्राप्त करने पर श्री लोधी को मार्च 2020 में नई दिल्ली में आयोजित पूसा कृषि विज्ञान मेला में नवोन्मेषी कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 70 एकड़ जमीन वाले श्री गुलाब सिंह ने इस साल मसूर की नई किस्में 11-5,11-6, 4719 पूसा, आईपीएल, कानपुर 423 के अलावा गेहूं की नई किस्में डीडीडब्ल्यू -187, पूसा 9832, एचआई -1634, जे.डब्ल्यू.-3382 और पूसा 6232 भी लगाई है। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा भेजी गई चने की दो किस्में भी प्रयोग के तौर पर लगाई है। आप धनिया, मेथी के अलावा कलौंजी और जीरा की भी खेती करते हैं।

  • सम्पर्क : 9303950547
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