उद्यानिकी के महत्व को समझें

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11 जून 2022, उद्यानिकी के महत्व को समझें – खेती को लाभकारी बनाने के लिये मिश्रित खेती का अपना अलग महत्व है। मिश्रित खेती केे विभिन्न घटकों में खेती के साथ-साथ बागवानी करके आय बढ़ाना सरल उपाय है। बगीचा लगाने से उसकी देखभाल अधिक महत्वपूर्ण मानी जानी चाहिये। फल बगीचों की देखरेख करने का समय वर्तमान में चल रहा है। फल प्रकृति की अनमोल भेंट है जो समाज के धार्मिक कार्य में सदियों से जुड़ा हुआ है। ऐसा कोई भी संस्कार नहीं हो सकता है जिसमें फलों की आवश्यकता न हो इसके अलावा इसके स्वास्थवर्धक गुणों से सभी परिचित हैं। पूर्वजों के द्वारा निर्मित फल बगीचे धरोहर की तरह आज भी हमारी सम्पत्ति है। हमारी कृषि में उद्यानिकी का महत्वपूर्ण स्थान सदैव रहा है और भविष्य में भी रहने वाला है। भारतीय कृषि की प्रधानता को देखते हुए अंग्रेजों के जमाने में सन् 1929 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की स्थापना की गई। शनै:-शनै: कृषि में प्रगति हुई पर उसके साथ-साथ उद्यानिकी की ओर भी ध्यान गया और फलों के विकास, विस्तार के लिये भी कार्य प्रस्तावित किये गये और कार्य शुरू किये गये सबसे पहले उत्तरप्रदेश में फल अनुसंधान केन्द्र सराहनपुर में तथा चोबटिया में खोले गये और विभिन्न प्रकार के फलों का विकास कार्य किया गया।

उद्यानिकी के महत्व को समझकर सोलन (हिमाचल प्रदेश) में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई और इसी कड़ी में प्रदेश स्तर तक भी उद्यानिकी विद्यालय की स्थापना की गई। उल्लेखनीय है कि देश में सबसे अधिक क्षेत्रफल में केले और आम फलों की खेती की जाती है। मिश्रित खेती का सबसे बड़ा हिस्सा उद्यानिकी के साथ ही जाता है। आज कृषकों में फलोत्पादन की ललक इतनी बढ़ गई है कि जो फल क्षेत्र विशेष में पैदा किये जाते थे वे अब सीमा तोडक़र अन्य क्षेत्रों में भी सफलता से लगाये जा रहे हैं, उदाहरण के लिये केला अब दक्षिण-पश्चिम प्रदेशों की सीमा से निकलकर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में भी सफलता से लगाया जाने लगा है। अंगूर उत्पादन में महाराष्ट्र में क्रांति ला दी है। नासिक के क्षेत्रों के कृषक की आय आज बढक़र कई गुना हो गई है। अंगूर के बाद बेर का विकास भी बड़ी तत्परता से किया गया। हमारे प्रदेश में भी मालवा क्षेत्र में अंगूर की खेती बड़ी सफलता से की जाकर आर्थिक उन्नति की ओर कृषक बढ़ रहे हैं। हमारे प्रदेश की मुख्य उद्यानिकी फसल आम थी, जिनका विकास कार्य उद्यानिकी विशेषज्ञों के द्वारा किया गया। जिनके अथक प्रयास से आम के वृक्षों में बडिंग/ग्राफ्टिंग करके पुराने पेड़ों का विकास किया गया।

वर्तमान में आम की जो प्रजातियां उपलब्ध हैं उनको लाने उनके विस्तार में उनका योगदान सराहनीय एवं स्मरणीय भी रहेगा। फल वृक्षों के वार्षिक रखरखाव पर जोर दिया जाना आज की प्राथमिकता हो। कटाई, छंटाई, बोर्डोपेस्ट का लेप तनों पर लगाना तथा उम्र के अनुरूप उन पेड़ों को खाद और उर्वरकों को दिया जाना भी आज का ही कार्य हो। आज ज्ञान का प्रकाश फैल चुका है। सभी जानते हंै कि पौधों की सक्रिय जड़ कहां है और वहीं पर खाद-पानी देकर पौधों को मजबूत बनाया जा सकता है। शासन के द्वारा बगीचा लगाने के लिये ओर से छोर तक की मदद खुले हाथों से देने का प्रावधान है। कहावत है जिन ढूंढा तिन पाईये अर्थात् जिन्होंने खोजा उन्हें मिल गया जो बैठे रहे तो उन्हें क्या मिल सकता है। अतएव कृषि में उद्यानिकी के महत्व को समझें, करंे और समझायें।

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