संपादकीय (Editorial)

कोरोना महामारी और लचर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं

कोरोना महामारी और लचर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं

कोरोना महामारी और लचर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं – इस समय कोरोना के दौर में जो भी रण में है, स्वयं में एक योद्धा है, चिकित्सा पेशे से जुड़े लोग, व्यवस्था बनाने में जुटा प्रशासन, अनुशासन बनाए रखने में पुलिस बिरादरी। इन सबसे जुदा एक और वर्ग है जो कोरोना की आमद से पहले, लॉकडाउन लगने से पहले से मैदान में जुटा है, जूझ रहा है। वो हैं हमारे किसान भाई। रबी की कटाई, खरीफ की बुवाई सभी काम खेत में रह कर ही हो सकते हैं। इन कामों के लिए आप वीडियो कांफ्रेंसिंग नहीं कर सकते, वेब सेमिनार संभव नहीं है। फसलों की देख-रेख के लिए खेत आपके पैरों की छाप मांगता है, मिट्टी आपके हाथों का स्पर्श चाहती है। कृषक जगत खेती से जुड़े उन सभी कृषक योद्धाओं का सम्मान करता है, अभिनन्दन करता है।

विश्व में कोरोना महामारी ने चीन के वुहान से निकलकर कोरिया से कनाडा तक पूरी दुनिया को अपने शिकंजे में कस लिया है। कोरोना संक्रमण का शुरुआती दौर भारत में महानगरों तक सीमित था और विदेश से आने वाले लोगों तक ही सीमित था। लॉकडाउन-1 में लोगों ने संयम बरता, अनावश्यक आवाजाही नहीं की। गांवों को इसकी हवा नहीं लगी, परन्तु 130 करोड़ की विशाल आबादी और भिन्न-भिन्न आर्थिक-सामाजिक स्तर, जीवन शैली के कारण, इसका प्रसार तय था। अब ये शहरों से निकल कर कस्बों और गांवों तक में पसर गया है। और ये अदृश्य शत्रु चुपके-चुपके, घरों में भी घुस गया है।

कोरोना संक्रमण के आंकड़े पल-पल बदल रहे हैं और भविष्य की भयावह तस्वीर खींच रहे हैं। आंकड़ों के आइने में भारत तीसरे स्थान पर है, ब्राजील के बाद। पर संक्रमण फैलने की गति यही रही तो हम बहुत जल्दी दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे। अभी भारत में कोरोना के 15 लाख से अधिक केस हैं। वहीं ब्राजील में ये संख्या 25 लाख तक पहुंच गई है, पर उस देश की कुल आबादी केवल 21 करोड़ के आसपास है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के थाली पीटो, ताली बजाओ, दीपक जलाओ अभियान ने जनजागृति जरूर विकसित की है, परन्तु इस महामारी से लडऩे के लिए ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा भोपाल के चिरायु अस्पताल या दिल्ली के एम्स जैसा कतई नहीं है। देहात के अस्पतालों में मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएं होती ही नहीं है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के विशेषज्ञ भी पूर्व में आशंका व्यक्त कर चुके हैं कि ये महामारी यदि गांवों में फैल गई तो इसका उन्मूलन कठिन है।

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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2019 में जारी नेशनल हेल्थ प्रोफाईल के मुताबिक देश में लगभग 26 हजार अस्पताल हैं जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 21 हजार से ऊपर है और शहरी क्षेत्र में 4,375 है। याने देश के 6 लाख 60 हजार से अधिक गांवों में अस्पताल कितने होंगे, आप अंदाजा लगा सकते हैं। अस्पतालों में पलंग की संख्या प्रति हजार आबादी पर एक भी पूरा उपलब्ध नहीं है। कोविड जांच की प्रयोगशालाएं अपर्याप्त है। जो अमला जुटा था, वो भी थक चुका है। सारांश यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में अपनी सुरक्षा अपने हाथों में है। अपने दैनंदिन जीवन के सारे कार्य, खेती-बाजार के काम सावधानी बरतते हुए करिए। मास्क लगाए रखिए। दूसरे व्यक्ति से सुरक्षित दूरी रखिए और कोरोना को हराइए।

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  • सुनील गंगराड़े
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