गाजर की खेती का पूरा गणित समझें, कब करें बुवाई, कौन-सी किस्म चुनें और कितनी खाद डालें; यहां जानें सबकुछ
14 अगस्त 2026, नई दिल्ली: गाजर की खेती का पूरा गणित समझें, कब करें बुवाई, कौन-सी किस्म चुनें और कितनी खाद डालें; यहां जानें सबकुछ – गाजर सब्जी की प्रमुख फसल होने के साथ-साथ कई औषधीय गुणों से भी भरपूर होती है। इसके सेवन से पेट और नसों से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिलता है। अगर आप गाजर की खेती करना चाहते हैं तो अभी इसकी बुवाई की तैयारी कर सकते हैं। गाजर की बुवाई का मुख्य समय अक्टूबर से नवंबर माना जाता है। अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी से लेकर सही बीज और खाद का इस्तेमाल करना जरूरी है।
खेत की तैयारी:
बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को पोला और भुरभुरा बना लें। गाजर की अच्छी जड़ों के विकास के लिए भुरभुरी मिट्टी जरूरी होती है।
गाजर की उन्नत किस्में:
एशियन वर्ग में पूसा केयर, पूसा मेधाली, पूसा रुधिरा, पूसा आसिता, पूसा वृष्टि, पूसा नयन ज्योति, सेलेक्शन-223, नंबर-29 और हिसार सेलेक्शन प्रमुख हैं। वहीं यूरोपीय वर्ग में लेन्टस, चैण्टने, इम्पेरेटर और पूसा यमदाग्नि जैसी किस्में शामिल हैं।
बीज और दूरी:
गाजर की बुवाई के लिए 5-6 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी करीब 10 सेंटीमीटर रखें।
खाद और सिंचाई:
फसल में 25 टन गोबर की खाद के साथ 130 किलो यूरिया, 250 किलो सिंगल सुपर फास्फेट और 200 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। गाजर की फसल में जरूरत के अनुसार 5-7 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें।
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