मूंग की खेती से कमाना चाहते हैं ज्यादा मुनाफा? अपनाएं ये 5 हाई-यील्डिंग किस्में, बढ़ेगी कमाई
20 जून 2026, नई दिल्ली: मूंग की खेती से कमाना चाहते हैं ज्यादा मुनाफा? अपनाएं ये 5 हाई-यील्डिंग किस्में, बढ़ेगी कमाई – मूंग देश की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है, जिसकी खेती खरीफ, रबी और गर्मी तीनों मौसमों में की जाती है। कम अवधि में तैयार होने और बाजार में अच्छी मांग के कारण किसानों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर आय के लिए उन्नत किस्मों की खेती करने की सलाह देते हैं। आज हम आपको मूंग की ऐसी 5 उन्नत किस्मों के बारे में बता रहे हैं, जो कम समय में तैयार होने के साथ-साथ अच्छी पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
1. SGC-20 (बुरोई): असम के किसानों के लिए उन्नत किस्म
SGC-20 (AAU SHN Moong-02), जिसे बुरोई नाम से भी जाना जाता है, मूंग की एक खुली परागित किस्म है। भारत सरकार ने वर्ष 2023 में इसे अधिसूचित किया था। यह किस्म विशेष रूप से असम की परिस्थितियों के लिए अनुशंसित की गई है। बेहतर अनुकूलन क्षमता और अच्छे उत्पादन के कारण यह किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
2. GAM-5: 19 क्विंटल तक उपज देने वाली किस्म
GAM-5 मूंग की एक उच्च उत्पादक किस्म है, जिसे आनंद कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात द्वारा विकसित किया गया है। यह किस्म 60 से 65 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और 18 से 19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह येलो मोजेक वायरस (YMV) रोग के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। खरीफ और गर्मी दोनों मौसमों में इसकी खेती की जा सकती है।
3. IPM 205-7 (विराट): कम अवधि और बेहतर उत्पादन
IPM 205-7, जिसे विराट के नाम से जाना जाता है, गर्मी के मौसम के लिए एक उपयुक्त मूंग किस्म मानी जाती है। यह फसल मात्र 52 से 55 दिनों में तैयार हो जाती है और 12 से 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है। साथ ही यह पीला मोजेक रोग के प्रति भी प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को फसल नुकसान का जोखिम कम रहता है।
4. HUM-16: कम समय में तैयार, अच्छी पैदावार
HUM-16 मूंग की एक उन्नत किस्म है, जो 55 से 58 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह किस्म विशेष रूप से गर्मी के मौसम के लिए उपयुक्त मानी जाती है। पीला मोजेक रोग का खतरा कम होने के कारण इसकी खेती सुरक्षित मानी जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है, जो किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ दिला सकती है।
5. PDM-139 (सम्राट): रोग प्रतिरोधी और लाभकारी किस्म
PDM-139 (सम्राट) मूंग की एक लोकप्रिय किस्म है, जो 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है। यह प्रति हेक्टेयर लगभग 12 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसकी प्रमुख विशेषता पीला मोजेक रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता है। कम अवधि और बेहतर गुणवत्ता के कारण यह किस्म किसानों के लिए लाभदायक विकल्प मानी जाती है।
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद हैं ये किस्में?
इन सभी किस्मों की खासियत कम अवधि में तैयार होना, बेहतर उत्पादन देना और प्रमुख रोगों के प्रति प्रतिरोधी होना है। इससे किसानों की लागत कम होती है और जोखिम भी घटता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान क्षेत्र और मौसम के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन करें तथा वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाएं, तो मूंग की खेती से बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।
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