धान की फसल पर मंडरा रहा गॉल मिज और ब्राउन स्पॉट का खतरा, एक्सपर्ट से जानें रोकथाम के उपाय
31 जुलाई 2026, नई दिल्ली: धान की फसल पर मंडरा रहा गॉल मिज और ब्राउन स्पॉट का खतरा, एक्सपर्ट से जानें रोकथाम के उपाय – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI), कटक ने “कृषि परामर्श सेवा: जुलाई 2026 के दूसरे पखवाड़े के लिए कृषि सलाह” में धान की फसल में गॉल मिज (Gall Midge) और ब्राउन स्पॉट (Brown Spot) के प्रबंधन को लेकर किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। संस्थान ने कहा है कि किसान फसल की नियमित निगरानी करें और लक्षण दिखाई देने पर अनुशंसित उपाय अपनाएं, ताकि नुकसान से बचा जा सके।
एडवाइजरी के अनुसार, यदि धान की फसल में गॉल मिज का प्रकोप दिखाई दे, तो किसानों को अनुशंसित कीटनाशियों का उपयोग करना चाहिए। इसके लिए फिप्रोनिल 5% SC, थायमेथोक्साम 25% WG, लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 5% EC, क्लोरपायरीफॉस 20% EC या कार्बोफ्यूरान 3% CG का निर्धारित मात्रा में प्रयोग किया जा सकता है। छिड़काव के दौरान प्रति एकड़ 200 लीटर पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
आईसीएआर ने ब्राउन स्पॉट (भूरा धब्बा रोग) को लेकर भी किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। एडवाइजरी के अनुसार, यदि फसल में भूरे धब्बों के लक्षण दिखाई दें, तो प्रोपिकोनाजोल 25 EC, मैनकोजेब 75 WP या कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% WP का प्रति लीटर पानी में अनुशंसित मात्रा के अनुसार छिड़काव किया जा सकता है।
संस्थान ने किसानों से कहा है कि खेत का नियमित निरीक्षण करते रहें और कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण उपाय अपनाएं। अनुशंसित मात्रा में ही रसायनों का उपयोग करें, ताकि धान की फसल को नुकसान से बचाया जा सके और बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सके।
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