टिंडा की फसल पर मंडराया डाउनी मिल्ड्यू का खतरा, किसान ऐसे करें तुरंत बचाव
21 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: टिंडा की फसल पर मंडराया डाउनी मिल्ड्यू का खतरा, किसान ऐसे करें तुरंत बचाव – टिंडा (राउण्ड गार्ड) की फसल में इन दिनों पत्तियों के पीले पड़ने की समस्या सामने आ रही है, जिसे कई किसान पोषक तत्वों की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति अक्सर डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew) नामक फफूंद जनित रोग का संकेत होती है, जो समय पर नियंत्रण न होने पर पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। यह रोग नमी और अनुकूल मौसम में तेजी से फैलता है और फसल की उत्पादकता पर सीधा असर डालता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग की शुरुआत पत्तियों की ऊपरी सतह पर हल्के पीले धब्बों से होती है, जबकि नीचे की सतह पर भूरे या बैंगनी रंग की फफूंद जैसी परत दिखाई देती है। धीरे-धीरे यह संक्रमण पूरे पौधे को कमजोर कर देता है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन में भारी गिरावट आने लगती है।
डाउनी मिल्ड्यू रोग के लक्षण
किसानों को फसल में कुछ प्रमुख संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। पत्तियों का पीला पड़ना इस रोग का शुरुआती संकेत है। इसके साथ ही पत्तियों की निचली सतह पर फफूंदनुमा परत बनना, पौधों का कमजोर होना और उनकी वृद्धि का रुक जाना भी प्रमुख लक्षण हैं। समय पर ध्यान न देने पर फसल का उत्पादन काफी कम हो जाता है।
पूसा संस्थान की सलाह: रिडोमिल से करें नियंत्रण
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग के नियंत्रण के लिए रिडोमिल (Ridomil) दवा का छिड़काव सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए 300 ग्राम रिडोमिल को 200 लीटर पानी में मिलाकर घोल तैयार किया जाता है, जो लगभग 1 एकड़ क्षेत्र के लिए पर्याप्त होता है। छिड़काव करते समय ध्यान रखना चाहिए कि घोल पत्तियों की ऊपरी और निचली दोनों सतहों पर अच्छी तरह पहुंचे, ताकि रोग पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां
किसानों को सलाह दी जाती है कि बारिश या सिंचाई के बाद फसल की नियमित निगरानी करें, खासकर पत्तियों की निचली सतह पर ध्यान दें। यदि आवश्यक हो तो 7 से 10 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत उपचार शुरू कर देना चाहिए ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
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