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फसल की खेती (Crop Cultivation)

आरएचबी बाजरा : कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली पोषक तत्वों से भरपूर उन्नत किस्म

01 जुलाई 2026, नई दिल्ली: आरएचबी बाजरा : कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली पोषक तत्वों से भरपूर उन्नत किस्म – यदि किसान कम समय में अधिक उपज, बेहतर पोषण गुणवत्ता और रोग-कीटों के प्रति अधिक सहनशील बाजरे की किस्म की तलाश कर रहे हैं, तो आरएचबी-233 (RHB-233) एक उत्कृष्ट विकल्प साबित हो सकती है। यह उन्नत संकर (हाइब्रिड) किस्म राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा (जयपुर) द्वारा विकसित की गई है। वर्ष 2019 में अधिसूचित की गई यह बायोफोर्टिफाइड किस्म किसानों को कम लागत में अधिक अनाज और गुणवत्तापूर्ण हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए विशेष रूप से विकसित की गई है।

आरएचबी-233 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कम अवधि में पकने की क्षमता है। यह किस्म लगभग 75 से 80 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान समय पर फसल की कटाई कर अगली फसल की बुवाई भी आसानी से कर सकते हैं। कम अवधि में तैयार होने के कारण यह बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है।

यह किस्म उच्च उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है। अनुकूल परिस्थितियों में इससे अच्छी गुणवत्ता वाला भरपूर दाना प्राप्त होता है। साथ ही, इसके पौधों से पर्याप्त मात्रा में हरा एवं सूखा चारा भी मिलता है, जिससे पशुपालक किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है। इस प्रकार यह किस्म फसल और पशुपालन दोनों के लिए लाभदायक साबित होती है।

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आरएचबी-233 एक बायोफोर्टिफाइड किस्म है, अर्थात इसमें सामान्य बाजरे की तुलना में लौह (आयरन) और जस्ता (जिंक) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसके नियमित उपयोग से कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि पोषण सुरक्षा की दृष्टि से भी यह किस्म महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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इस किस्म में कई प्रमुख रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता भी देखी गई है। इससे फसल पर रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है और किसानों को कीटनाशकों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता। परिणामस्वरूप उत्पादन लागत घटती है और लाभ में वृद्धि होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार आरएचबी-233 उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जहां वर्षा सीमित होती है और किसान कम संसाधनों में अधिक उत्पादन चाहते हैं। इसकी अच्छी अनुकूलन क्षमता के कारण यह विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है, बशर्ते अनुशंसित कृषि तकनीकों का पालन किया जाए।

बढ़ती जलवायु चुनौतियों और पोषण सुरक्षा की आवश्यकता को देखते हुए आरएचबी-233 जैसी उन्नत बाजरा किस्में किसानों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रही हैं। यह न केवल अधिक उत्पादन और बेहतर आय का माध्यम है, बल्कि पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में खरीफ मौसम में बाजरे की खेती करने वाले किसान इस उन्नत किस्म को अपनाकर अपनी उत्पादकता और लाभ दोनों बढ़ा सकते हैं।

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